Correct Answer:
Option B - रामचन्द्रिका तुलसीदास की रचना नहीं है।
⇒ रामचन्द्रिका (1601) रीतिकाल के प्रवर्तक आचार्य केशवदास की रचना है जो 39 प्रकाशों में विभाजित महाकाव्य है। वह रामकाव्य पर आधारित है।
⇒ मूल गोसाई चरित्र (वेणी माधव) के अनुसार तुलसी ने केशव को ‘प्राकृत कवि’ कहा था। इस लांछन से मुक्त होने तथा रामचरितमानस की प्रतिस्पर्धा में, केशव ने ‘रामचन्द्रिका’ की रचना एक रात में कर दी थी।
⇒ पीताम्बर दत्त बड़खाल ने रामचन्द्रिका को ‘फुटकल कवित्तों का संग्रह’ तथा रामस्वरूप चतुर्वेदी ने ‘छंदों का अजायबहार’ कहा है।
⇒ शुक्ल जी ने केशव को ‘कठिन काव्य का प्रेत’ तथा डॉ. विजयपाल सिंह ‘कोर्ट का कवि’ कहा है।
⇒ केशव निम्बार्क सम्प्रदाचय में दीक्षित थे।
⇒ केशव ने कविप्रिया की रचना इंद्रजीत सिंह की प्रेमिका गणिका प्रवीण राय को शिक्षा देने के लिए की थी।
⇒ केशवदास की रचनाएँ-रसिकाप्रिया (1591), कविप्रिया (1601), रामचन्द्रिका (1601), रतनबाबनी (1607), वीरसिंह देव चरित (1607), जहाँगीरजस चन्द्रिका (1612), विज्ञानगीता (1610) छंदमाला, बारहमासा।
⇒ तुलसीदास रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है। ये रामानुजाचार्य के ‘श्री सम्प्रदाय’ और विशिष्टद्वैतवाद से प्रभावित थे। इनकी भक्ति भावना ‘दास्य भाव’ की थी।
⇒ शुक्ल जी ने इन्हें ‘स्मार्ट वैष्णव’ मानते है।
⇒ गोस्वामी तुलसीकृत 12 ग्रंथों को ही प्रामाणिक माना जाता है इसमें 5 बड़े और 7 छोटे है।
⇒ तुलसीदास की रचनाएँ-वैराग्य संदीपनी, राासा प्रश्न (दोहावली रामायण), रामललानहछू, जानकी मंगल, रामचरितमानस, पार्वतीमंगल, कृष्ण गीतावली, गीतावली (पदावली रामायण), विनयपत्रिका (विनयावली, रामगीतावली, दोहावली, बरवै रामायण, कवितावली (हनुमानबाहुक)।
⇒ रामचरितमानस और कवितावली में तुलसीदास जी ने कलिकाल का वर्णन किया है।
⇒ कवितावली में 7 काण्डों में रामकथा का वर्णन तथा बनारस (काशी) के तत्कालीन समय में फैले ‘महामारी’ का वर्णन ‘उत्तरकाण्ड’ में किया गया है। हनुमानबाहुक इसी का भाग माना जाता है।
⇒ विनयपत्रिका ब्रज भाषा में लिखा तुलसीदास का गीतिकाव्य है। तुलसी ने इसमें आत्मनिवेदन व रामभक्ति की याचना की है। कलियुग के अत्याचारियों के खिलाफ यह तुलसी की राम से ‘फरियाद’ है। यह प्रपत्ति काव्य है।
B. रामचन्द्रिका तुलसीदास की रचना नहीं है।
⇒ रामचन्द्रिका (1601) रीतिकाल के प्रवर्तक आचार्य केशवदास की रचना है जो 39 प्रकाशों में विभाजित महाकाव्य है। वह रामकाव्य पर आधारित है।
⇒ मूल गोसाई चरित्र (वेणी माधव) के अनुसार तुलसी ने केशव को ‘प्राकृत कवि’ कहा था। इस लांछन से मुक्त होने तथा रामचरितमानस की प्रतिस्पर्धा में, केशव ने ‘रामचन्द्रिका’ की रचना एक रात में कर दी थी।
⇒ पीताम्बर दत्त बड़खाल ने रामचन्द्रिका को ‘फुटकल कवित्तों का संग्रह’ तथा रामस्वरूप चतुर्वेदी ने ‘छंदों का अजायबहार’ कहा है।
⇒ शुक्ल जी ने केशव को ‘कठिन काव्य का प्रेत’ तथा डॉ. विजयपाल सिंह ‘कोर्ट का कवि’ कहा है।
⇒ केशव निम्बार्क सम्प्रदाचय में दीक्षित थे।
⇒ केशव ने कविप्रिया की रचना इंद्रजीत सिंह की प्रेमिका गणिका प्रवीण राय को शिक्षा देने के लिए की थी।
⇒ केशवदास की रचनाएँ-रसिकाप्रिया (1591), कविप्रिया (1601), रामचन्द्रिका (1601), रतनबाबनी (1607), वीरसिंह देव चरित (1607), जहाँगीरजस चन्द्रिका (1612), विज्ञानगीता (1610) छंदमाला, बारहमासा।
⇒ तुलसीदास रामभक्ति शाखा के प्रतिनिधि कवि है। ये रामानुजाचार्य के ‘श्री सम्प्रदाय’ और विशिष्टद्वैतवाद से प्रभावित थे। इनकी भक्ति भावना ‘दास्य भाव’ की थी।
⇒ शुक्ल जी ने इन्हें ‘स्मार्ट वैष्णव’ मानते है।
⇒ गोस्वामी तुलसीकृत 12 ग्रंथों को ही प्रामाणिक माना जाता है इसमें 5 बड़े और 7 छोटे है।
⇒ तुलसीदास की रचनाएँ-वैराग्य संदीपनी, राासा प्रश्न (दोहावली रामायण), रामललानहछू, जानकी मंगल, रामचरितमानस, पार्वतीमंगल, कृष्ण गीतावली, गीतावली (पदावली रामायण), विनयपत्रिका (विनयावली, रामगीतावली, दोहावली, बरवै रामायण, कवितावली (हनुमानबाहुक)।
⇒ रामचरितमानस और कवितावली में तुलसीदास जी ने कलिकाल का वर्णन किया है।
⇒ कवितावली में 7 काण्डों में रामकथा का वर्णन तथा बनारस (काशी) के तत्कालीन समय में फैले ‘महामारी’ का वर्णन ‘उत्तरकाण्ड’ में किया गया है। हनुमानबाहुक इसी का भाग माना जाता है।
⇒ विनयपत्रिका ब्रज भाषा में लिखा तुलसीदास का गीतिकाव्य है। तुलसी ने इसमें आत्मनिवेदन व रामभक्ति की याचना की है। कलियुग के अत्याचारियों के खिलाफ यह तुलसी की राम से ‘फरियाद’ है। यह प्रपत्ति काव्य है।