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Q: तुल्यास्यप्रयत्नं किम्?
  • A. संयोग:
  • B. सवर्णम्
  • C. लोप:
  • D. वृद्धि:
Correct Answer: Option B - ‘तुल्यास्यप्रयत्नं सवर्णम्’ अर्थात् जिन वर्णों के उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान होते हैं उनकी सवर्ण सञ्ज्ञा होती है। कभी कभी उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान न होने पर भी सवर्णता मान ली जाती है जैसे – ‘ऋऌवर्णयोर्मिथ: सावर्ण्यम् वाच्यम्’ इस वार्तिक से ऋ और लृ के उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान न होने पर भी इस वार्तिक से इनकी सवर्णसञ्ज्ञा मान ली गई है।
B. ‘तुल्यास्यप्रयत्नं सवर्णम्’ अर्थात् जिन वर्णों के उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान होते हैं उनकी सवर्ण सञ्ज्ञा होती है। कभी कभी उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान न होने पर भी सवर्णता मान ली जाती है जैसे – ‘ऋऌवर्णयोर्मिथ: सावर्ण्यम् वाच्यम्’ इस वार्तिक से ऋ और लृ के उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान न होने पर भी इस वार्तिक से इनकी सवर्णसञ्ज्ञा मान ली गई है।

Explanations:

‘तुल्यास्यप्रयत्नं सवर्णम्’ अर्थात् जिन वर्णों के उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान होते हैं उनकी सवर्ण सञ्ज्ञा होती है। कभी कभी उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान न होने पर भी सवर्णता मान ली जाती है जैसे – ‘ऋऌवर्णयोर्मिथ: सावर्ण्यम् वाच्यम्’ इस वार्तिक से ऋ और लृ के उच्चारण स्थान तथा प्रयत्न समान न होने पर भी इस वार्तिक से इनकी सवर्णसञ्ज्ञा मान ली गई है।