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Q: त्रिपिटक पवित्र धर्मग्रंथ कौन से धर्म से संबंधित है?
  • A. हिंदू धर्म
  • B. पारसी धर्म
  • C. जैन धर्म
  • D. बौद्ध धर्म
Correct Answer: Option D - बौद्ध साहित्य को ‘त्रिपिटक’ कहा जाता है। ये पालि भाषा में रचित है। बुद्ध की मृत्यु के बाद उनकी शिक्षाओं को संकलित कर तीन भागों विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक में विभाजित किया गया है, यहाँ पिटक शब्द का अर्थ होता है– टोकरी। सुत्त पिटक– सुत्त का अर्थ धर्म उपदेश होता है। इस पिटक में बौद्ध धर्म के उपदेश संग्रहीत है। इसमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएँ भी है। विनय पिटक– इस पिटक में मठ में निवास करने वाले भिक्षु एवं भिक्षुणियों के दैनिक जीवन सम्बन्धी आचार विचार एवं अनुशासन सम्बन्धी नियम दिये गये है। अभिधम्म पिटक– इस पिटक में बौद्ध दार्शनिक सिद्धान्तों का वर्णन है।
D. बौद्ध साहित्य को ‘त्रिपिटक’ कहा जाता है। ये पालि भाषा में रचित है। बुद्ध की मृत्यु के बाद उनकी शिक्षाओं को संकलित कर तीन भागों विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक में विभाजित किया गया है, यहाँ पिटक शब्द का अर्थ होता है– टोकरी। सुत्त पिटक– सुत्त का अर्थ धर्म उपदेश होता है। इस पिटक में बौद्ध धर्म के उपदेश संग्रहीत है। इसमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएँ भी है। विनय पिटक– इस पिटक में मठ में निवास करने वाले भिक्षु एवं भिक्षुणियों के दैनिक जीवन सम्बन्धी आचार विचार एवं अनुशासन सम्बन्धी नियम दिये गये है। अभिधम्म पिटक– इस पिटक में बौद्ध दार्शनिक सिद्धान्तों का वर्णन है।

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बौद्ध साहित्य को ‘त्रिपिटक’ कहा जाता है। ये पालि भाषा में रचित है। बुद्ध की मृत्यु के बाद उनकी शिक्षाओं को संकलित कर तीन भागों विनय पिटक, सुत्त पिटक और अभिधम्म पिटक में विभाजित किया गया है, यहाँ पिटक शब्द का अर्थ होता है– टोकरी। सुत्त पिटक– सुत्त का अर्थ धर्म उपदेश होता है। इस पिटक में बौद्ध धर्म के उपदेश संग्रहीत है। इसमें बुद्ध के पूर्व जन्म की कथाएँ भी है। विनय पिटक– इस पिटक में मठ में निवास करने वाले भिक्षु एवं भिक्षुणियों के दैनिक जीवन सम्बन्धी आचार विचार एवं अनुशासन सम्बन्धी नियम दिये गये है। अभिधम्म पिटक– इस पिटक में बौद्ध दार्शनिक सिद्धान्तों का वर्णन है।