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Q: ‘‘दु:ख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात।’’ यह काव्यपंक्ति किस कृति की है?
  • A. चाँद का मुँह टेढ़ा है
  • B. साकेत
  • C. कामायनी
  • D. यामा
Correct Answer: Option C - ‘‘दु:ख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात।’’ यह काव्यपंक्ति ‘कामायनी’ की है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। कामायनी का प्रकाशन 1935 ई. में हुआ था।
C. ‘‘दु:ख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात।’’ यह काव्यपंक्ति ‘कामायनी’ की है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। कामायनी का प्रकाशन 1935 ई. में हुआ था।

Explanations:

‘‘दु:ख की पिछली रजनी बीच विकसता सुख का नवल प्रभात।’’ यह काव्यपंक्ति ‘कामायनी’ की है। इसके लेखक जयशंकर प्रसाद हैं। कामायनी का प्रकाशन 1935 ई. में हुआ था।