search
Q: ‘‘दम्भोलि घटितेयं रसना या दारुणदानवोदन्तोदीरणै: न दीर्यते’’ यह पंक्ति उद्धृत है
  • A. दशकुमारचरित से
  • B. कादम्बरी से
  • C. उत्तररामचरित से
  • D. शिवराजविजय से
Correct Answer: Option D - ‘‘दम्भोलिघटितेयं रसना या दारुणदानवोदन्तोदीरणै: न दीर्यते’’ यह पंक्ति महाकवि अम्बिकादत्त व्यास कृत शिवराजविजय से उद्धृत है। ब्रह्मचारी के गुरु ने कहना आरम्भ किया-भगवन् ! यह (मेरी) जिह्वा वङ्का से बनी है, जो कि दारुण (भीषण), दानवों (यवनों) के वृत्तान्त के वर्णन से विदीर्ण नहीं हो जाती। शिवराज विजय वीररस प्रधान काव्य है। इसका मंगलाचरण ‘नमस्कारात्मक’ और ‘वस्तुनिर्देशात्मक’ है।
D. ‘‘दम्भोलिघटितेयं रसना या दारुणदानवोदन्तोदीरणै: न दीर्यते’’ यह पंक्ति महाकवि अम्बिकादत्त व्यास कृत शिवराजविजय से उद्धृत है। ब्रह्मचारी के गुरु ने कहना आरम्भ किया-भगवन् ! यह (मेरी) जिह्वा वङ्का से बनी है, जो कि दारुण (भीषण), दानवों (यवनों) के वृत्तान्त के वर्णन से विदीर्ण नहीं हो जाती। शिवराज विजय वीररस प्रधान काव्य है। इसका मंगलाचरण ‘नमस्कारात्मक’ और ‘वस्तुनिर्देशात्मक’ है।

Explanations:

‘‘दम्भोलिघटितेयं रसना या दारुणदानवोदन्तोदीरणै: न दीर्यते’’ यह पंक्ति महाकवि अम्बिकादत्त व्यास कृत शिवराजविजय से उद्धृत है। ब्रह्मचारी के गुरु ने कहना आरम्भ किया-भगवन् ! यह (मेरी) जिह्वा वङ्का से बनी है, जो कि दारुण (भीषण), दानवों (यवनों) के वृत्तान्त के वर्णन से विदीर्ण नहीं हो जाती। शिवराज विजय वीररस प्रधान काव्य है। इसका मंगलाचरण ‘नमस्कारात्मक’ और ‘वस्तुनिर्देशात्मक’ है।