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Q: The disease which wiped out one third of the population of Europe in the 12th and 13th centuries was- 12वीं और 13वीं शताब्दी में इनमें से किस बीमारी की वजह से यूरोप की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई थी–
  • A. Plague/प्लेग
  • B. Cholera/है़जा
  • C. Meningitis/मस्तिष्क ज्वर
  • D. Diphtheria/डिप्थीरिया
Correct Answer: Option A - 12वीं और 13वीं शताब्दी में प्लेग बीमारी से यूरोप की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई थी। ताउन या प्लेग संसार की सबसे पुरानी महामारी में से एक है। मुख्य रूप से यह कृंतक प्राणियों (प्राय: चूहे) का रोग है, जो पाश्चुरेला पेस्टिस नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है। आदमी को यह रोग प्रत्यक्ष संसर्ग अथवा पिस्सू के दंश से लगता है। यह तीव्र गति से बढ़ता है, बुखार तेज और लसीका ग्रन्थियाँ स्पर्शसहन एवं सूजी होती है रक्तपुतिता की प्रवृत्ति होती है और कभी-कभी न्यूमोनिया का रूप धारण करता है।
A. 12वीं और 13वीं शताब्दी में प्लेग बीमारी से यूरोप की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई थी। ताउन या प्लेग संसार की सबसे पुरानी महामारी में से एक है। मुख्य रूप से यह कृंतक प्राणियों (प्राय: चूहे) का रोग है, जो पाश्चुरेला पेस्टिस नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है। आदमी को यह रोग प्रत्यक्ष संसर्ग अथवा पिस्सू के दंश से लगता है। यह तीव्र गति से बढ़ता है, बुखार तेज और लसीका ग्रन्थियाँ स्पर्शसहन एवं सूजी होती है रक्तपुतिता की प्रवृत्ति होती है और कभी-कभी न्यूमोनिया का रूप धारण करता है।

Explanations:

12वीं और 13वीं शताब्दी में प्लेग बीमारी से यूरोप की एक तिहाई आबादी नष्ट हो गई थी। ताउन या प्लेग संसार की सबसे पुरानी महामारी में से एक है। मुख्य रूप से यह कृंतक प्राणियों (प्राय: चूहे) का रोग है, जो पाश्चुरेला पेस्टिस नामक जीवाणु द्वारा उत्पन्न होता है। आदमी को यह रोग प्रत्यक्ष संसर्ग अथवा पिस्सू के दंश से लगता है। यह तीव्र गति से बढ़ता है, बुखार तेज और लसीका ग्रन्थियाँ स्पर्शसहन एवं सूजी होती है रक्तपुतिता की प्रवृत्ति होती है और कभी-कभी न्यूमोनिया का रूप धारण करता है।