The subject of Sittanvasal cave paintings is related to/ सित्तनवासल गुफा चित्रों का विषय किससे सम्बन्धित है?
भारतीय मूल के रवि आहूजा को हाल ही में किस कंपनी का नया सीईओ नियुक्त किया है?
‘धान-गन्ना-पेड़ी’ की शस्य-सघनता है-
In Ms Excel, what is the shortcut to insert a line break while editing a cell?
Which of the following class of bricks have water absorption about 25 percent of dry weight?
A sport car going at an average speed of 108 km/h takes 15 minutes to complete a lap on a racing track. How much speed (in km/h) should be increased to complete the lap in 9 minutes?
Select the option that is related to the third letter-cluster in the same way as the second letter-cluster is related to the first letter-cluster. उस विकल्प का चयन करें जो तीसरे अक्षर-समूह से उसी प्रकार संबंधित है, जिस प्रकार दूसरा अक्षर -समूह पहले अक्षर- समूह से संबंधित है। SOLDIER : IERDSOL :: ARMOURY :?
The recommended method of projection according to BIS is............. BIS के अनुसार प्रक्षेप की संस्तुति विधि है।
निर्देश–नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (1 से 9 तक) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए– मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है, जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह-उमंग के साथ दूसरों की सेवा-सुश्रूषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगे। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट सम्बन्धी, मित्र, बन्धु-बांधव जीवनभर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अन्तर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-सदा के लिए अमर हो जाएँ। सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने नि:स्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानव जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अन्तर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है। यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को अध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है। ‘नि:स्वार्थ’ शब्द का उपयुक्त विपरीतार्थी शब्द है–
Select the most appropriate synonym of the given word: SPURIOUS
Explanations:
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