Correct Answer:
Option D - भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार एक साझेदारी फर्म को अपना पंजीयन करवाना अनिवार्य नहीं है। साथ ही पंजीयन न कराने पर किसी प्रकार के दण्ड की व्यवस्था भी नहीं है, परन्तु एक पंजीकृत फर्म के साझेदार फर्म के विरुद्ध, आपस में एक-दूसरे के विरुद्ध अथवा किसी अन्य तृतीय पक्ष के विरुद्ध वाद प्रस्तुत कर सकता है। इसी प्रकार एक पंजीकृत फर्म किसी अन्य पक्ष के विरुद्ध वाद प्रस्तुत कर सकती है, जबकि पंजीयन के अभाव में ऐसा सम्भव नहीं है।
D. भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 के अनुसार एक साझेदारी फर्म को अपना पंजीयन करवाना अनिवार्य नहीं है। साथ ही पंजीयन न कराने पर किसी प्रकार के दण्ड की व्यवस्था भी नहीं है, परन्तु एक पंजीकृत फर्म के साझेदार फर्म के विरुद्ध, आपस में एक-दूसरे के विरुद्ध अथवा किसी अन्य तृतीय पक्ष के विरुद्ध वाद प्रस्तुत कर सकता है। इसी प्रकार एक पंजीकृत फर्म किसी अन्य पक्ष के विरुद्ध वाद प्रस्तुत कर सकती है, जबकि पंजीयन के अभाव में ऐसा सम्भव नहीं है।