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Q: The word Yava reffered in Rig-Veda is applied for which agro product? ऋग्वेद में उल्लिखित `यव' शब्द किस कृषि उत्पाद हेतु प्रयुक्त किया गया है?
  • A. Barley/जौ
  • B. Gram/चना
  • C. Rice/चावल
  • D. Wheat/गेहूँ
Correct Answer: Option A - वैदिककाल के आर्यों का व्यवसाय कृषि था। शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं - जुताई, बुआई, कटाई तथा मड़ाई का उल्लेख हुआ है। काठक संहिता में 24 बैलों द्वारा खींचे जाने वाले हलों का उल्लेख मिलता है। ब्रीहि (धान), यव, (जौ), माण (उड़द), मुदग (मूँग), गोधूम (गेहूँ), मसूर आदि अनाजों का वर्णन यजुर्वेद में मिलता है। यद्यपि ऋग्वैदिक काल के लोग जौ (यव) उत्पादित करते थे, परन्तु उत्तर वैदिक काल में उनकी मुख्य फसल धान और गेहूँ हो गयी। कृषि के साथ ही पशुपालन वैदिक काल का प्रमुख व्यवसाय था। पशुओं में गाय ऋग्वैदिक अर्थव्यवस्था का आधार थी जिसका ऋग्वेद में 176 बार प्रयोग हुआ है। गाय की महत्ता के कारण उसे ‘अघन्या’ कहा जाता था। गाय एक मूल्यवान सम्पत्ति समझी जाती थी। गाय को लेकर अक्सर युद्ध भी होता रहता था। गाय के अतिरिक्त घोड़ा, एक अन्य महत्वपूर्ण पशु था, जिसका प्रयोग वैदिक लोग युद्धों में बड़े पैमाने पर करते थे। इसके साथ वे लोग भेड़, बकरी, भैंस आदि से परिचित थें।
A. वैदिककाल के आर्यों का व्यवसाय कृषि था। शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं - जुताई, बुआई, कटाई तथा मड़ाई का उल्लेख हुआ है। काठक संहिता में 24 बैलों द्वारा खींचे जाने वाले हलों का उल्लेख मिलता है। ब्रीहि (धान), यव, (जौ), माण (उड़द), मुदग (मूँग), गोधूम (गेहूँ), मसूर आदि अनाजों का वर्णन यजुर्वेद में मिलता है। यद्यपि ऋग्वैदिक काल के लोग जौ (यव) उत्पादित करते थे, परन्तु उत्तर वैदिक काल में उनकी मुख्य फसल धान और गेहूँ हो गयी। कृषि के साथ ही पशुपालन वैदिक काल का प्रमुख व्यवसाय था। पशुओं में गाय ऋग्वैदिक अर्थव्यवस्था का आधार थी जिसका ऋग्वेद में 176 बार प्रयोग हुआ है। गाय की महत्ता के कारण उसे ‘अघन्या’ कहा जाता था। गाय एक मूल्यवान सम्पत्ति समझी जाती थी। गाय को लेकर अक्सर युद्ध भी होता रहता था। गाय के अतिरिक्त घोड़ा, एक अन्य महत्वपूर्ण पशु था, जिसका प्रयोग वैदिक लोग युद्धों में बड़े पैमाने पर करते थे। इसके साथ वे लोग भेड़, बकरी, भैंस आदि से परिचित थें।

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वैदिककाल के आर्यों का व्यवसाय कृषि था। शतपथ ब्राह्मण में कृषि की चारों क्रियाओं - जुताई, बुआई, कटाई तथा मड़ाई का उल्लेख हुआ है। काठक संहिता में 24 बैलों द्वारा खींचे जाने वाले हलों का उल्लेख मिलता है। ब्रीहि (धान), यव, (जौ), माण (उड़द), मुदग (मूँग), गोधूम (गेहूँ), मसूर आदि अनाजों का वर्णन यजुर्वेद में मिलता है। यद्यपि ऋग्वैदिक काल के लोग जौ (यव) उत्पादित करते थे, परन्तु उत्तर वैदिक काल में उनकी मुख्य फसल धान और गेहूँ हो गयी। कृषि के साथ ही पशुपालन वैदिक काल का प्रमुख व्यवसाय था। पशुओं में गाय ऋग्वैदिक अर्थव्यवस्था का आधार थी जिसका ऋग्वेद में 176 बार प्रयोग हुआ है। गाय की महत्ता के कारण उसे ‘अघन्या’ कहा जाता था। गाय एक मूल्यवान सम्पत्ति समझी जाती थी। गाय को लेकर अक्सर युद्ध भी होता रहता था। गाय के अतिरिक्त घोड़ा, एक अन्य महत्वपूर्ण पशु था, जिसका प्रयोग वैदिक लोग युद्धों में बड़े पैमाने पर करते थे। इसके साथ वे लोग भेड़, बकरी, भैंस आदि से परिचित थें।