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उत्तररामचरितस्य तृतीयाङ्कस्याऽऽरम्भ: तत:प्रविशति नदीद्वयम्’ वाक्येन भवति। उत्तररामचरितम् के तृतीय अंक का प्रारम्भ तत: प्रविशति नदीद्वयम्’ वाक्य से होता है। तृतीय अंक का आरम्भ तमसा-मुरला नामक दो नदियों के वार्तालाप से होता है। उत्तररामचरितम् भवभूति की नाट्य कृति है। यह सात अंकों में विभक्त है। इसमें ‘नमस्कारात्मक मंगलाचरण’ का प्रयोग हुआ है। तृतीय अंक का अपर नाम ‘छायांक’ है।