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Q: विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के ......... का परिणाम है।
  • A. विसंबंधन
  • B. वियोजन
  • C. अंत:क्रिया
  • D. स्वतंत्र कार्य
Correct Answer: Option C - विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के अन्त:क्रिया का परिणाम है। प्रकृति एवं पोषण मनोविज्ञान एवं सामाजिक मनोविज्ञान की शब्दावली और अवधारणा है जिसका प्रयोग व्यक्तियों के जन्मजात सहज गुणों (स्वभाव अथवा प्रकृति) एवं उसकी परवरिश और पालन पोषण के दौरान मिले पर्यावरण और माहौल के प्रभावों के द्वारा विकसित व्यवहार के लक्षणों की आपसी सम्पूरकता और विरोधाभासों का विवेचन किया जाता है। प्रकृति एक बच्चे के वंशानुगत कारकों या जीन को संदर्भित करता है, जो न केवल एक बच्चे के शारीरिक उपस्थिति को परिभाषित करता है, बल्कि-बच्चे के व्यक्तित्व लक्षणों के निर्माण में भी मदद करता है। दूसरी ओर पोषण का तात्पर्य विभिन्न पर्यावरणीय कारकों से है जो हमारे व्यक्तित्व लक्षणों, हमारे बचपन के अनुभवों, बच्चे की परवरिश, सामाजिक संबंधों और संस्कृति के बारे में बताते हैं। अत: विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के अन्त:क्रिया का परिणाम है।
C. विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के अन्त:क्रिया का परिणाम है। प्रकृति एवं पोषण मनोविज्ञान एवं सामाजिक मनोविज्ञान की शब्दावली और अवधारणा है जिसका प्रयोग व्यक्तियों के जन्मजात सहज गुणों (स्वभाव अथवा प्रकृति) एवं उसकी परवरिश और पालन पोषण के दौरान मिले पर्यावरण और माहौल के प्रभावों के द्वारा विकसित व्यवहार के लक्षणों की आपसी सम्पूरकता और विरोधाभासों का विवेचन किया जाता है। प्रकृति एक बच्चे के वंशानुगत कारकों या जीन को संदर्भित करता है, जो न केवल एक बच्चे के शारीरिक उपस्थिति को परिभाषित करता है, बल्कि-बच्चे के व्यक्तित्व लक्षणों के निर्माण में भी मदद करता है। दूसरी ओर पोषण का तात्पर्य विभिन्न पर्यावरणीय कारकों से है जो हमारे व्यक्तित्व लक्षणों, हमारे बचपन के अनुभवों, बच्चे की परवरिश, सामाजिक संबंधों और संस्कृति के बारे में बताते हैं। अत: विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के अन्त:क्रिया का परिणाम है।

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विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के अन्त:क्रिया का परिणाम है। प्रकृति एवं पोषण मनोविज्ञान एवं सामाजिक मनोविज्ञान की शब्दावली और अवधारणा है जिसका प्रयोग व्यक्तियों के जन्मजात सहज गुणों (स्वभाव अथवा प्रकृति) एवं उसकी परवरिश और पालन पोषण के दौरान मिले पर्यावरण और माहौल के प्रभावों के द्वारा विकसित व्यवहार के लक्षणों की आपसी सम्पूरकता और विरोधाभासों का विवेचन किया जाता है। प्रकृति एक बच्चे के वंशानुगत कारकों या जीन को संदर्भित करता है, जो न केवल एक बच्चे के शारीरिक उपस्थिति को परिभाषित करता है, बल्कि-बच्चे के व्यक्तित्व लक्षणों के निर्माण में भी मदद करता है। दूसरी ओर पोषण का तात्पर्य विभिन्न पर्यावरणीय कारकों से है जो हमारे व्यक्तित्व लक्षणों, हमारे बचपन के अनुभवों, बच्चे की परवरिश, सामाजिक संबंधों और संस्कृति के बारे में बताते हैं। अत: विकास प्रकृति एवं पालन-पोषण के अन्त:क्रिया का परिणाम है।