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Q: ‘‘वीणा हि नाम असमुद्रोत्थितं रत्नम्’’ इत्युक्ति: कस्य?
  • A. विदूषकस्य
  • B. शकारस्य
  • C. चारुदत्तस्य
  • D. रेभिलस्य
Correct Answer: Option C - ‘वीणा हि नाम-असमुद्रोत्थितं रत्नम्’ इत्युक्ति: ‘चारुदत्तस्य’ अस्ति। शूद्रककृत ‘मृच्छकटिकम्’ ग्रन्थ में धीरप्रशान्त (ब्राह्मण) कोटि का नायक है चारुदत्त ‘रेभिल’ के गीत को सुनकर, भावविभोर होकर वीणा की प्रशंसा में उसने यह उक्ति कही है कि ‘वीणा तो वास्तव में बिना समुद्र से निकला हुआ रत्न है।’ विदूषक (मैत्रेय) चारुदत्त का मित्र है और शकार प्रतिनायक और राजा पालक का श्यालक (साला) है तथा रेभिल चारुदत्त का मित्र एक गायक (उज्जयिनी का व्यापारी) है।
C. ‘वीणा हि नाम-असमुद्रोत्थितं रत्नम्’ इत्युक्ति: ‘चारुदत्तस्य’ अस्ति। शूद्रककृत ‘मृच्छकटिकम्’ ग्रन्थ में धीरप्रशान्त (ब्राह्मण) कोटि का नायक है चारुदत्त ‘रेभिल’ के गीत को सुनकर, भावविभोर होकर वीणा की प्रशंसा में उसने यह उक्ति कही है कि ‘वीणा तो वास्तव में बिना समुद्र से निकला हुआ रत्न है।’ विदूषक (मैत्रेय) चारुदत्त का मित्र है और शकार प्रतिनायक और राजा पालक का श्यालक (साला) है तथा रेभिल चारुदत्त का मित्र एक गायक (उज्जयिनी का व्यापारी) है।

Explanations:

‘वीणा हि नाम-असमुद्रोत्थितं रत्नम्’ इत्युक्ति: ‘चारुदत्तस्य’ अस्ति। शूद्रककृत ‘मृच्छकटिकम्’ ग्रन्थ में धीरप्रशान्त (ब्राह्मण) कोटि का नायक है चारुदत्त ‘रेभिल’ के गीत को सुनकर, भावविभोर होकर वीणा की प्रशंसा में उसने यह उक्ति कही है कि ‘वीणा तो वास्तव में बिना समुद्र से निकला हुआ रत्न है।’ विदूषक (मैत्रेय) चारुदत्त का मित्र है और शकार प्रतिनायक और राजा पालक का श्यालक (साला) है तथा रेभिल चारुदत्त का मित्र एक गायक (उज्जयिनी का व्यापारी) है।