Explanations:
व्याकरण में कर्म का मुख्य लक्षण ‘‘कर्तुरीप्सिततमं कर्म’’ कहा गया है। अर्थात् कर्ता को जो सर्वाधिक अभीष्ट होता है, उसे ही कर्म कहा जाता है। जैसे-‘‘हरि: पुस्तकं पठति’’ में हरि कर्ता को पुस्तक पढ़ना सर्वाधिक अभीष्ट है, अत: यहाँ ‘पुस्तक’ कर्म है।