Correct Answer:
Option A - एक मद या सेवा की माँग-संतुष्टिकारक क्षमता प्रयोज्यता (Utility) कहलाती है। अर्थशास्त्र की भाषा में, किसी वस्तु या सेवा के जिस गुण से मानवीय आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जाता है, उसे उस वस्तु की उपयोगिता कहते हैं।
A. एक मद या सेवा की माँग-संतुष्टिकारक क्षमता प्रयोज्यता (Utility) कहलाती है। अर्थशास्त्र की भाषा में, किसी वस्तु या सेवा के जिस गुण से मानवीय आवश्यकताओं को संतुष्ट किया जाता है, उसे उस वस्तु की उपयोगिता कहते हैं।