Correct Answer:
Option C - 1917 की क्रांति के दौरान बोल्शेविकों का नारा ‘शांति भूमि, रोटी’ था। बोल्शेविक क्रांति (नवम्बर–1917) के समय रूस के राजनीतिक मंच पर लेनिन का प्रादुर्भाव हुआ। जार की सरकार ने उसे निर्वासित कर दिया था वह स्विटजरलैंड में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहा था मार्च 1917 ई. में क्रांति हुई, वह जर्मनी की सहायता से रूस पहुँचा तब रूस की जनता का उत्साह बढ़ गया। लेनिन ने घोषित किया कि रूसी क्रांति पूरी नहीं हुई है, अत: एक दूसरी क्रांति अनिवार्य है। उसने बोल्शेविक दल का कार्यक्रम स्पष्ट किया जो, ‘‘अप्रैल थिसिस’’ के नाम से प्रसिद्ध है। लेनिन ने तीन नारे दिये-भूमि, शांति और रोटी। लेनिन ने बल प्रयोग द्वारा केरेन्सकी सरकार को उलट देने का निश्चय किया।
C. 1917 की क्रांति के दौरान बोल्शेविकों का नारा ‘शांति भूमि, रोटी’ था। बोल्शेविक क्रांति (नवम्बर–1917) के समय रूस के राजनीतिक मंच पर लेनिन का प्रादुर्भाव हुआ। जार की सरकार ने उसे निर्वासित कर दिया था वह स्विटजरलैंड में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहा था मार्च 1917 ई. में क्रांति हुई, वह जर्मनी की सहायता से रूस पहुँचा तब रूस की जनता का उत्साह बढ़ गया। लेनिन ने घोषित किया कि रूसी क्रांति पूरी नहीं हुई है, अत: एक दूसरी क्रांति अनिवार्य है। उसने बोल्शेविक दल का कार्यक्रम स्पष्ट किया जो, ‘‘अप्रैल थिसिस’’ के नाम से प्रसिद्ध है। लेनिन ने तीन नारे दिये-भूमि, शांति और रोटी। लेनिन ने बल प्रयोग द्वारा केरेन्सकी सरकार को उलट देने का निश्चय किया।