Correct Answer:
Option D - महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण के अल्प समय के पश्चात् ही उनके उपदेशों को संगृहीत करने, उनका पाठन करने आदि के उद्देश्य से संगीति (सम्मेलन) की प्रथा चल पड़ी। इन्हें धम्म संगीति कहा जाता है। संगीति का अर्थ है साथ-साथ गाना।
प्रथम बौद्ध संगीति–समय–483 ई. पू., स्थान–राजगृह, अध्यक्ष–महाकस्सप, शासनकाल–अजातशत्रु। दो पिट्टकों सुत्त एवं विनय का संकलन हुआ।
द्वितीय बौद्ध संगीति–समय–383 ई.पू., स्थान–वैशाली, अध्यक्ष–सर्वकामी, शासनकाल–कलाशोक। बौद्ध धर्म, स्थाविर एवं महासंघिक में विभक्त हो गया। (मानसिक विभाजन)
तृतीय बौद्ध संगीति–समय–255 ई.पू., स्थान–पाटलिपुत्र, अध्यक्ष–मोग्गलिपुत्ततिस्स, शासनकाल–अशोक। अभिधम्मपिटक का संकलन
चतुर्थ बौद्ध संगीति– समय - प्रथम शताब्दी, स्थान–कुण्डलवन, अध्यक्ष वसुमित्र/अश्वघोष, शासनकाल–कनिष्क बौद्ध धर्म हीनयान एवं महायान में विभक्त हो गया।
D. महात्मा बुद्ध के परिनिर्वाण के अल्प समय के पश्चात् ही उनके उपदेशों को संगृहीत करने, उनका पाठन करने आदि के उद्देश्य से संगीति (सम्मेलन) की प्रथा चल पड़ी। इन्हें धम्म संगीति कहा जाता है। संगीति का अर्थ है साथ-साथ गाना।
प्रथम बौद्ध संगीति–समय–483 ई. पू., स्थान–राजगृह, अध्यक्ष–महाकस्सप, शासनकाल–अजातशत्रु। दो पिट्टकों सुत्त एवं विनय का संकलन हुआ।
द्वितीय बौद्ध संगीति–समय–383 ई.पू., स्थान–वैशाली, अध्यक्ष–सर्वकामी, शासनकाल–कलाशोक। बौद्ध धर्म, स्थाविर एवं महासंघिक में विभक्त हो गया। (मानसिक विभाजन)
तृतीय बौद्ध संगीति–समय–255 ई.पू., स्थान–पाटलिपुत्र, अध्यक्ष–मोग्गलिपुत्ततिस्स, शासनकाल–अशोक। अभिधम्मपिटक का संकलन
चतुर्थ बौद्ध संगीति– समय - प्रथम शताब्दी, स्थान–कुण्डलवन, अध्यक्ष वसुमित्र/अश्वघोष, शासनकाल–कनिष्क बौद्ध धर्म हीनयान एवं महायान में विभक्त हो गया।