Explanations:
भारत के उच्चतम न्यायालय को भारतीय संविधान की व्याख्या करने का अंतिम अधिकार प्राप्त है वह संंसद या विधानमण्डलों द्वारा पारित किसी अधिनियम तथा कार्यपालिका के किसी आदेश की वैधता तथा अवैधता का निर्णय संविधान के प्रावधानों के दायरें में करता है जिसे न्यायिक पुनर्विलोकन कहा जाता है। न्यायिक पुनर्विलोकन की शक्ति द्वारा उच्चतम न्यायालय विधि विरूद्ध कानून को असंवैधानिक घोषित कर सकता है। एक ओर जहाँ मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में उच्चतम न्यायालय अनु० 13 तथा अनु. 32 के अधीन अपनी इस शक्ति का प्रयोग कर सकता है वही इस सन्दर्भ में अनु. 137 भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। जिसमें कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय को अपने द्वारा निर्णय या आदेश का पुनर्विलोकन करने का अधिकार प्राप्त है।