Correct Answer:
Option B - ‘तंजौर चित्र’ शैली चोल वंशीय राजाओं के संरक्षण में फूली-फूली। तंजौर में निर्मित ‘वृद्धीश्वर मंदिर’ 1000 ई. के आस-पास प्रतापी चोल सम्राट राजराज द्वारा बनवाया गया। इसी कारण यह राज राजेश्वर मंदिर के नाम से पुकारा जाता है।
• चोल काल में निर्मित दूसरा मंदिर चोल नरेश राजेन्द्र प्रथम ने 1025 ई. में गंगैकोड चोलपुरम में बनवाया। इसका विशाल मण्डप 150 स्तम्भों पर आधारित है। व इसकी ऊँचाई 168 फूट है।
B. ‘तंजौर चित्र’ शैली चोल वंशीय राजाओं के संरक्षण में फूली-फूली। तंजौर में निर्मित ‘वृद्धीश्वर मंदिर’ 1000 ई. के आस-पास प्रतापी चोल सम्राट राजराज द्वारा बनवाया गया। इसी कारण यह राज राजेश्वर मंदिर के नाम से पुकारा जाता है।
• चोल काल में निर्मित दूसरा मंदिर चोल नरेश राजेन्द्र प्रथम ने 1025 ई. में गंगैकोड चोलपुरम में बनवाया। इसका विशाल मण्डप 150 स्तम्भों पर आधारित है। व इसकी ऊँचाई 168 फूट है।