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Q: Which of the following is a function of lime in brick manufacturing?/ईंट निर्माण में निम्नलिखित में से कौन-सा चूने का कार्य हैं?
  • A. it helps silica in clay to melt in the furnace यह मृदा में मौजूद सिलिका को भट्ठी में पिघलने में मदद करता है।
  • B. it absorbs water and renders the clay plastic यह पानी को अवशोषित करता है और मृदा को प्लास्टिक बनाता है।
  • C. it gives colour to the brick यह ईंट को रंग प्रदान करता है।
  • D. it gives colour to the brick यह ईंट की अपारगम्यता में सुधार करता है।
Correct Answer: Option A - ईंट मृदा में विभिन्न घटकों के कार्य- चूना (lime) : यह गालक का कार्य करता है और सिलिका के कणों को पिघलाने में सहायक होता है। चूना उच्च ताप पर बालू के साथ मिलकर कैल्सियम सिलिकेट बनाता है, जो ईंट के कणों को आपस में बांधने का कार्य करता है। चूने का अनुपात अधिक होने पर, सिलिका के कण कम ताप पर ही पिघल जाते है जिससे ईंट विकृत हो जाती है। सिलिका (Silica)-यह ईंट की मिट्टी का मुख्य घटक है। सिलिका ईंट की सामर्थ्य बढ़ाता है और इसके कोनो व किनारों को मजबूती प्रदान करता है। सिलिका ईंट को सिकुड़ने तथा दरार पड़ने, टेढ़ा होने तथा फटने से रोकता है और ईंट सही आकार में ढ़ाली जा सकती है। एल्युमिना (Alumina)–Alumina में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंट को वांछित आकार देती है। ईंट मृदा में मृत्तिका व सिल्ट दोनों मिलाकर 50% से कम नहीं होनी चाहिए। आयरन (Iron)-यह ईंट को अपना विशेष लाल रंग प्रदान करता है। आयरन की मात्रा 5% से अधिक होने पर ईंट का रंग काला नीला पड़ जाता है। मैग्नीशिया (Magnesia) - मैग्नीशिया ईंट को पीला रंग प्रदान करता है तथा संकुचन (Shrinkage) को कम करता है। ईंट में इसकी अधिकता से ईंट का क्षरण होने लगता है। यह भी गालक का कार्य करता है।
A. ईंट मृदा में विभिन्न घटकों के कार्य- चूना (lime) : यह गालक का कार्य करता है और सिलिका के कणों को पिघलाने में सहायक होता है। चूना उच्च ताप पर बालू के साथ मिलकर कैल्सियम सिलिकेट बनाता है, जो ईंट के कणों को आपस में बांधने का कार्य करता है। चूने का अनुपात अधिक होने पर, सिलिका के कण कम ताप पर ही पिघल जाते है जिससे ईंट विकृत हो जाती है। सिलिका (Silica)-यह ईंट की मिट्टी का मुख्य घटक है। सिलिका ईंट की सामर्थ्य बढ़ाता है और इसके कोनो व किनारों को मजबूती प्रदान करता है। सिलिका ईंट को सिकुड़ने तथा दरार पड़ने, टेढ़ा होने तथा फटने से रोकता है और ईंट सही आकार में ढ़ाली जा सकती है। एल्युमिना (Alumina)–Alumina में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंट को वांछित आकार देती है। ईंट मृदा में मृत्तिका व सिल्ट दोनों मिलाकर 50% से कम नहीं होनी चाहिए। आयरन (Iron)-यह ईंट को अपना विशेष लाल रंग प्रदान करता है। आयरन की मात्रा 5% से अधिक होने पर ईंट का रंग काला नीला पड़ जाता है। मैग्नीशिया (Magnesia) - मैग्नीशिया ईंट को पीला रंग प्रदान करता है तथा संकुचन (Shrinkage) को कम करता है। ईंट में इसकी अधिकता से ईंट का क्षरण होने लगता है। यह भी गालक का कार्य करता है।

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ईंट मृदा में विभिन्न घटकों के कार्य- चूना (lime) : यह गालक का कार्य करता है और सिलिका के कणों को पिघलाने में सहायक होता है। चूना उच्च ताप पर बालू के साथ मिलकर कैल्सियम सिलिकेट बनाता है, जो ईंट के कणों को आपस में बांधने का कार्य करता है। चूने का अनुपात अधिक होने पर, सिलिका के कण कम ताप पर ही पिघल जाते है जिससे ईंट विकृत हो जाती है। सिलिका (Silica)-यह ईंट की मिट्टी का मुख्य घटक है। सिलिका ईंट की सामर्थ्य बढ़ाता है और इसके कोनो व किनारों को मजबूती प्रदान करता है। सिलिका ईंट को सिकुड़ने तथा दरार पड़ने, टेढ़ा होने तथा फटने से रोकता है और ईंट सही आकार में ढ़ाली जा सकती है। एल्युमिना (Alumina)–Alumina में बंधक पदार्थ के गुण होते हैं चिकनी मिट्टी सुघट्य होने के कारण बालू के कणों को जोड़े रखती है और ईंट को वांछित आकार देती है। ईंट मृदा में मृत्तिका व सिल्ट दोनों मिलाकर 50% से कम नहीं होनी चाहिए। आयरन (Iron)-यह ईंट को अपना विशेष लाल रंग प्रदान करता है। आयरन की मात्रा 5% से अधिक होने पर ईंट का रंग काला नीला पड़ जाता है। मैग्नीशिया (Magnesia) - मैग्नीशिया ईंट को पीला रंग प्रदान करता है तथा संकुचन (Shrinkage) को कम करता है। ईंट में इसकी अधिकता से ईंट का क्षरण होने लगता है। यह भी गालक का कार्य करता है।