Correct Answer:
Option D - जब पत्थरों की विभिन्न ढंग से गढ़ाई करके मसाले से दीवार में लगाया जाता है तो इसे ऐश्लर चिनाई कहते हैं।
∎ ऐश्लर चिनाई, चिनाई का वह प्रकार है जिसमें पत्थर की अच्छे से गढ़ाई करके तथा जिनके जोड़ों की मोटाई 3 mm से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसे यादृच्छित मोटी एस्लर चिनाई (Random coursed ashlar masonry) कहते हैं।
∎ जब परीक्षण 60 मिमी. सीधे किनारे के साथ किया जाता है तो फलक पर कोई बिन्दु 1 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए।
∎ वास्तव में लम्बवत और क्षैतिज जोड़ देने के लिए प्रत्येक पत्थर को आवश्यक आकार और आकृति में काटा जाना चाहिए।
D. जब पत्थरों की विभिन्न ढंग से गढ़ाई करके मसाले से दीवार में लगाया जाता है तो इसे ऐश्लर चिनाई कहते हैं।
∎ ऐश्लर चिनाई, चिनाई का वह प्रकार है जिसमें पत्थर की अच्छे से गढ़ाई करके तथा जिनके जोड़ों की मोटाई 3 mm से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसे यादृच्छित मोटी एस्लर चिनाई (Random coursed ashlar masonry) कहते हैं।
∎ जब परीक्षण 60 मिमी. सीधे किनारे के साथ किया जाता है तो फलक पर कोई बिन्दु 1 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए।
∎ वास्तव में लम्बवत और क्षैतिज जोड़ देने के लिए प्रत्येक पत्थर को आवश्यक आकार और आकृति में काटा जाना चाहिए।