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Q: Which of the following is NOT a characteristic of ashlar stone masonry ? निम्नलिखित में से कौन-सी ऐश्लर पत्थर चिनाई की विशेषता नहीं है ?
  • A. Every stone must be cut to the required size and shape to give truly vertical and horizontal joints/वास्तव में लम्बवत और क्षैतिज जोड़ देने के लिए प्रत्येक पत्थर को आवश्यक आकार और आकृति में काटा जाना चाहिए।
  • B. Horizontal and vertical lines should not vary more than 3 mm and 6 mm, respectively क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर रेखाएँ क्रमश: 3 मिमी. और 6 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए।
  • C. No point on the faces should vary more than about 1 mm when tested with a 60 mm straight edge/जब परीक्षण 60 मिमी. सीधे किनारे के साथ किया जाता है तो फलक पर कोई बिन्दु 1 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए।
  • D. No portion of the dressed surface should be more than 10 mm from a straight edge placed on it/पृष्ठ सतही का कोई भी भाग उस पर रखे सीधे किनारे 10 मिमी. से अधिक नहीं होना चाहिए।
Correct Answer: Option D - जब पत्थरों की विभिन्न ढंग से गढ़ाई करके मसाले से दीवार में लगाया जाता है तो इसे ऐश्लर चिनाई कहते हैं। ∎ ऐश्लर चिनाई, चिनाई का वह प्रकार है जिसमें पत्थर की अच्छे से गढ़ाई करके तथा जिनके जोड़ों की मोटाई 3 mm से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसे यादृच्छित मोटी एस्लर चिनाई (Random coursed ashlar masonry) कहते हैं। ∎ जब परीक्षण 60 मिमी. सीधे किनारे के साथ किया जाता है तो फलक पर कोई बिन्दु 1 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए। ∎ वास्तव में लम्बवत और क्षैतिज जोड़ देने के लिए प्रत्येक पत्थर को आवश्यक आकार और आकृति में काटा जाना चाहिए।
D. जब पत्थरों की विभिन्न ढंग से गढ़ाई करके मसाले से दीवार में लगाया जाता है तो इसे ऐश्लर चिनाई कहते हैं। ∎ ऐश्लर चिनाई, चिनाई का वह प्रकार है जिसमें पत्थर की अच्छे से गढ़ाई करके तथा जिनके जोड़ों की मोटाई 3 mm से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसे यादृच्छित मोटी एस्लर चिनाई (Random coursed ashlar masonry) कहते हैं। ∎ जब परीक्षण 60 मिमी. सीधे किनारे के साथ किया जाता है तो फलक पर कोई बिन्दु 1 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए। ∎ वास्तव में लम्बवत और क्षैतिज जोड़ देने के लिए प्रत्येक पत्थर को आवश्यक आकार और आकृति में काटा जाना चाहिए।

Explanations:

जब पत्थरों की विभिन्न ढंग से गढ़ाई करके मसाले से दीवार में लगाया जाता है तो इसे ऐश्लर चिनाई कहते हैं। ∎ ऐश्लर चिनाई, चिनाई का वह प्रकार है जिसमें पत्थर की अच्छे से गढ़ाई करके तथा जिनके जोड़ों की मोटाई 3 mm से अधिक नहीं होनी चाहिए। उसे यादृच्छित मोटी एस्लर चिनाई (Random coursed ashlar masonry) कहते हैं। ∎ जब परीक्षण 60 मिमी. सीधे किनारे के साथ किया जाता है तो फलक पर कोई बिन्दु 1 मिमी. से अधिक भिन्न नहीं होना चाहिए। ∎ वास्तव में लम्बवत और क्षैतिज जोड़ देने के लिए प्रत्येक पत्थर को आवश्यक आकार और आकृति में काटा जाना चाहिए।