Explanations:
माइटोकांड्रिया- यह केवल यूकैरियोटिक कोशिका में पाई जाती है। जिसका मुख्य कार्य श्वसन क्रिया को संपादित करना है। यह दोहरी-झिल्ली आवरण से घिरा होता है। माइटोकांड्रिया में ऑक्सीजन की उपस्थिति में भोजन के विखंडन से ऊर्जा मुक्त होती है जो ATP के रूप में संचित रहती है। यही कारण है कि माइटोकांड्रिया को ‘कोशिका का पावरहाऊस’ कहा जाता है। केन्द्रक- केन्द्रक सघ्भी यूकैरियोटिक कोशिकाओं में पाया जाने वाला एक दोहरी-झिल्ली वाला अंगक है, जो कोशिकीय गतिविधियों के नियंत्रण केन्द्र के रूप में कार्य करता है। राइबोसोम- ये राइबो न्यूक्लिक अम्ल (RNA) व प्रोटीन से बनी रचनाएँ हैं जिन पर कोई आवरण नहीं पाया जाता है। ये अंत:प्रद्रव्यी जालिका की झिल्लियों की सतह पर चिपके होते हैं या फिर अकेले या गुच्छों में कोशिका द्रव्य में बिखरे रहते हैं। प्लास्टिड्स- प्लास्टिड्स सभी पादप कोशिकाओं व कुछ प्रोटोजोआ में पाये जाते हैं। ये बड़े, झिल्ली बद्ध अंगक होते हैं। इनमें पाए जाने वाले विशिष्ट प्रकार के वर्णकों के आधार पर शिम्पर ने इन्हें तीन वर्गों में बाँटा है- (i) हरित लवक (ii) वर्णी लवक (iii) अवर्णी लवक