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Q: Which of the following statements about Permanent Settlement are correct? निम्नलिखित में से कौन-से कथन स्थायी बन्दोबस्त के सम्बन्ध में सही हैं? 1. It conferred proprietary rights to peasants. इसने कृषकों को स्वामित्व का अधिकार प्रदान किया। 2. The Zamindars were recognized as the proprietory of land/जमींदारों को भूमि के स्वामियों के रूप में मान्यता मिली। 3. The Government permanently fixed the land revenue demand./सरकार ने भूमि लगान माँग को स्थायी रूप से निश्चित कर दिया। 4. The Zamindars acted as the middlemen between the peasants and the government. जमींदार, कृषकों और सरकार के बीच मध्यस्थों की भूमिका निभाने लगे। Select the code answer using the code given below : नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए : Codes :/कूट
  • A. 2, 3 and 4/2, 3 और 4
  • B. 3 and 4 only/केवल 3 और 4
  • C. 1 and 4/1 और 4
  • D. 1 and 3/1 और 3
Correct Answer: Option A - 1793 की स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था को लॉर्ड कॉर्नवालिस के समय में लागू किया गया। इसे इस्तमरारी व्यवस्था या जमींदारी व्यवस्था के नाम से जाना जाता था। इसके अन्तर्गत जमींदारों को भूमि का स्थायी मालिक बना दिया गया। भूमि पर उनका अधिकार पैतृक एवं हस्तांतरणीय था। उन्हें भूमि से तब तक पृथक नहीं किया जाता था, जब तक वे अपना निश्चित लगान सरकार को देते रहे। किसानों से भूमि संबंधी व अन्य परम्परागत अधिकारों को छीन लिया गया। जमींदार भूमि के स्वामी होने के कारण भूमि को खरीद या बेच सकते थे। जमींदार, कृषकों और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते थें। रैयतवाड़ी व्यवस्था में कृषकों को भूमि का मालिक माना गया था।
A. 1793 की स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था को लॉर्ड कॉर्नवालिस के समय में लागू किया गया। इसे इस्तमरारी व्यवस्था या जमींदारी व्यवस्था के नाम से जाना जाता था। इसके अन्तर्गत जमींदारों को भूमि का स्थायी मालिक बना दिया गया। भूमि पर उनका अधिकार पैतृक एवं हस्तांतरणीय था। उन्हें भूमि से तब तक पृथक नहीं किया जाता था, जब तक वे अपना निश्चित लगान सरकार को देते रहे। किसानों से भूमि संबंधी व अन्य परम्परागत अधिकारों को छीन लिया गया। जमींदार भूमि के स्वामी होने के कारण भूमि को खरीद या बेच सकते थे। जमींदार, कृषकों और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते थें। रैयतवाड़ी व्यवस्था में कृषकों को भूमि का मालिक माना गया था।

Explanations:

1793 की स्थायी बंदोबस्त व्यवस्था को लॉर्ड कॉर्नवालिस के समय में लागू किया गया। इसे इस्तमरारी व्यवस्था या जमींदारी व्यवस्था के नाम से जाना जाता था। इसके अन्तर्गत जमींदारों को भूमि का स्थायी मालिक बना दिया गया। भूमि पर उनका अधिकार पैतृक एवं हस्तांतरणीय था। उन्हें भूमि से तब तक पृथक नहीं किया जाता था, जब तक वे अपना निश्चित लगान सरकार को देते रहे। किसानों से भूमि संबंधी व अन्य परम्परागत अधिकारों को छीन लिया गया। जमींदार भूमि के स्वामी होने के कारण भूमि को खरीद या बेच सकते थे। जमींदार, कृषकों और सरकार के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते थें। रैयतवाड़ी व्यवस्था में कृषकों को भूमि का मालिक माना गया था।