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Q: Which of the following statements is correct about the causes of the Revolt of 1857? 1857 के विद्रोह के कारणों के बारे में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है? I. धार्मिक हस्तक्षेप। I. Religious interference II. जातीय अहंकार। II. Racial Arrogance III. समान वेतन। III. Equal Pay
  • A. I and III/I तथा III
  • B. I and II/I तथा II
  • C. Only I/केवल I
  • D. II and III/II तथा III
Correct Answer: Option B - 1857 का विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ भारत में एक शक्तिशाली विद्रोह था। 1857 का विद्रोह मुख्यत: उत्तरी और मध्य भारत तक ही सीमित था। वर्षों से भारत में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की विस्तारवादी नीतियों, प्रशासनिक नवाचारों और आर्थिक शोषण के परिणाम स्वरूप भारत के लोगों में असंतोष पैदा हुआ। यही असंतोष 1857 के विद्रोह के कारण के तौर पर माना जाता है। धार्मिक कारण: 1857 में अंग्रेजों द्वारा लाए गए सामाजिक-धार्मिक सुधारों जैसे सती प्रथा का उन्मूलन, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन आदि को समाज के बड़े वर्ग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था। धार्मिक नि:शक्तता अधिनियम लाकर उन्होंने हिन्दू रीति-रिवाजों को बदलने का प्रयास किया। इसके अलावा मूर्तिपूजा की निंदा की, हिन्दू देवी-देविताओं का उपहास किया और अंधविश्वासों और प्रथाओं के खिलाफ थे। जातीय कारण : भारतवासियों को ईसाई पादरी लालच देकर ईसाई बना रहे थे। अंग्रेजी शिक्षा के प्रचार-प्रसार के कारण भारतवासियों में असंतोष पैदा हो गया। जिसके कारण भारतीय जनता अंग्रेजों के विरुद्ध हो गई। इसके अतिरिक्त वे जाति भेद की भावना से भी प्रेरित थे वे भारतीयों को हेय दृष्टि से देखते थे और हिन्दुओं को बर्बर और मुसलमानों को कट्टरपंथी, निर्दयी और बेईमान समझते थे।
B. 1857 का विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ भारत में एक शक्तिशाली विद्रोह था। 1857 का विद्रोह मुख्यत: उत्तरी और मध्य भारत तक ही सीमित था। वर्षों से भारत में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की विस्तारवादी नीतियों, प्रशासनिक नवाचारों और आर्थिक शोषण के परिणाम स्वरूप भारत के लोगों में असंतोष पैदा हुआ। यही असंतोष 1857 के विद्रोह के कारण के तौर पर माना जाता है। धार्मिक कारण: 1857 में अंग्रेजों द्वारा लाए गए सामाजिक-धार्मिक सुधारों जैसे सती प्रथा का उन्मूलन, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन आदि को समाज के बड़े वर्ग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था। धार्मिक नि:शक्तता अधिनियम लाकर उन्होंने हिन्दू रीति-रिवाजों को बदलने का प्रयास किया। इसके अलावा मूर्तिपूजा की निंदा की, हिन्दू देवी-देविताओं का उपहास किया और अंधविश्वासों और प्रथाओं के खिलाफ थे। जातीय कारण : भारतवासियों को ईसाई पादरी लालच देकर ईसाई बना रहे थे। अंग्रेजी शिक्षा के प्रचार-प्रसार के कारण भारतवासियों में असंतोष पैदा हो गया। जिसके कारण भारतीय जनता अंग्रेजों के विरुद्ध हो गई। इसके अतिरिक्त वे जाति भेद की भावना से भी प्रेरित थे वे भारतीयों को हेय दृष्टि से देखते थे और हिन्दुओं को बर्बर और मुसलमानों को कट्टरपंथी, निर्दयी और बेईमान समझते थे।

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1857 का विद्रोह ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ भारत में एक शक्तिशाली विद्रोह था। 1857 का विद्रोह मुख्यत: उत्तरी और मध्य भारत तक ही सीमित था। वर्षों से भारत में ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कम्पनी की विस्तारवादी नीतियों, प्रशासनिक नवाचारों और आर्थिक शोषण के परिणाम स्वरूप भारत के लोगों में असंतोष पैदा हुआ। यही असंतोष 1857 के विद्रोह के कारण के तौर पर माना जाता है। धार्मिक कारण: 1857 में अंग्रेजों द्वारा लाए गए सामाजिक-धार्मिक सुधारों जैसे सती प्रथा का उन्मूलन, विधवा पुनर्विवाह का समर्थन आदि को समाज के बड़े वर्ग द्वारा स्वीकार नहीं किया गया था। धार्मिक नि:शक्तता अधिनियम लाकर उन्होंने हिन्दू रीति-रिवाजों को बदलने का प्रयास किया। इसके अलावा मूर्तिपूजा की निंदा की, हिन्दू देवी-देविताओं का उपहास किया और अंधविश्वासों और प्रथाओं के खिलाफ थे। जातीय कारण : भारतवासियों को ईसाई पादरी लालच देकर ईसाई बना रहे थे। अंग्रेजी शिक्षा के प्रचार-प्रसार के कारण भारतवासियों में असंतोष पैदा हो गया। जिसके कारण भारतीय जनता अंग्रेजों के विरुद्ध हो गई। इसके अतिरिक्त वे जाति भेद की भावना से भी प्रेरित थे वे भारतीयों को हेय दृष्टि से देखते थे और हिन्दुओं को बर्बर और मुसलमानों को कट्टरपंथी, निर्दयी और बेईमान समझते थे।