Correct Answer:
Option D - बर्हिजात या बहिर्मुुखी वृक्ष (Exogenous or out ward growing trees)– ये वृक्ष ऊँचाई के साथ-साथ मोटाई (तने की मोटाई) में भी बढ़ते हैं। इनकी छाल के नीचे प्रतिवर्ष एक वलय (Ring) जुड़ जाता है। इन वृक्षों का उपयोग इंजीनियरिंग कार्यों में अधिक किया जाता है। उदाहरण– टीक, शीशम, साल, देवदार, चीड़ तथा बबूल आदि।
अंतर्जात या अन्तर्मुखी वृक्ष (Endogenous or Inward growing trees)– ये वृक्ष ऊँचाई में तो बढ़ते ही है, परन्तु मोटाई में बाहर की ओर नहीं बढ़ते हैं। इनका घेरा बहुत कम होता है। इनकी ऊँचाई में वृद्धि कडि़यों (Links) में होती है। इसके तने के भीतर स्पष्ट वलय न होकर लम्बे-लम्बे रेशे निकलते हैं। इनका तना लम्बा, पतला व लचकदार होता है। इंजीनियरिंग कार्यों में अंतर्जात वृक्षों का उपयोग नाम मात्र है।
उदाहरण– बाँस, नारियल, ताड़, खजूर व बेंत इत्यादि।
D. बर्हिजात या बहिर्मुुखी वृक्ष (Exogenous or out ward growing trees)– ये वृक्ष ऊँचाई के साथ-साथ मोटाई (तने की मोटाई) में भी बढ़ते हैं। इनकी छाल के नीचे प्रतिवर्ष एक वलय (Ring) जुड़ जाता है। इन वृक्षों का उपयोग इंजीनियरिंग कार्यों में अधिक किया जाता है। उदाहरण– टीक, शीशम, साल, देवदार, चीड़ तथा बबूल आदि।
अंतर्जात या अन्तर्मुखी वृक्ष (Endogenous or Inward growing trees)– ये वृक्ष ऊँचाई में तो बढ़ते ही है, परन्तु मोटाई में बाहर की ओर नहीं बढ़ते हैं। इनका घेरा बहुत कम होता है। इनकी ऊँचाई में वृद्धि कडि़यों (Links) में होती है। इसके तने के भीतर स्पष्ट वलय न होकर लम्बे-लम्बे रेशे निकलते हैं। इनका तना लम्बा, पतला व लचकदार होता है। इंजीनियरिंग कार्यों में अंतर्जात वृक्षों का उपयोग नाम मात्र है।
उदाहरण– बाँस, नारियल, ताड़, खजूर व बेंत इत्यादि।