Correct Answer:
Option B - तंत्रिकाएँ शरीर में टेलीफोन के तार जैसा काम करती हैं। तंत्रिकाओं का कार्य संवेदी तंत्रकीय संकेतों को शरीर के एक भाग से दूसरे भागों तक संवहन करना होता है। त्वचा, नाक, कान, आँख आदि संवेदांगी अंगों की तंत्रिका संवेदी कोशिकाएँ जब बाहरी उद्दीपनों को ग्रहण करती है तो इनसे संबंधित संवेदी, अर्थात अभिवाही तंत्रिका कोशिकाओं के तन्तुओं (Sensory or afferent Nerve Fibres) में विद्युत प्रवाह के रूप में संवेदी प्रेरणाएं उत्पन्न होती है, जिन्हें ये तन्तु केन्द्रीय तंत्रिका तंतु में पहुँचाते हैं। केन्द्रीय तंत्र से प्रेरक अर्थात अपवाही तंत्रिका कोशिकाओं के तन्तु चालक प्रेरणाओं को पेशियों एवं ग्रंथियों अर्थात अपवाह अंगों द्वारा प्रक्रियाएं करते है।
B. तंत्रिकाएँ शरीर में टेलीफोन के तार जैसा काम करती हैं। तंत्रिकाओं का कार्य संवेदी तंत्रकीय संकेतों को शरीर के एक भाग से दूसरे भागों तक संवहन करना होता है। त्वचा, नाक, कान, आँख आदि संवेदांगी अंगों की तंत्रिका संवेदी कोशिकाएँ जब बाहरी उद्दीपनों को ग्रहण करती है तो इनसे संबंधित संवेदी, अर्थात अभिवाही तंत्रिका कोशिकाओं के तन्तुओं (Sensory or afferent Nerve Fibres) में विद्युत प्रवाह के रूप में संवेदी प्रेरणाएं उत्पन्न होती है, जिन्हें ये तन्तु केन्द्रीय तंत्रिका तंतु में पहुँचाते हैं। केन्द्रीय तंत्र से प्रेरक अर्थात अपवाही तंत्रिका कोशिकाओं के तन्तु चालक प्रेरणाओं को पेशियों एवं ग्रंथियों अर्थात अपवाह अंगों द्वारा प्रक्रियाएं करते है।