Correct Answer:
Option D - पेय जल में अवशेष क्लोरीन को पता लगाने के लिए ऑर्थोटॉलिडाइन परीक्षण व स्टार्च आयोडाइड परीक्षण किया जाता है, जबकि क्लोरोमाइन परीक्षण द्वारा अवशेष क्लोरीन का पता नहीं लगाया जाता है। पेयजल में महामारी के दौरान अवशेष क्लोरीन की मात्रा 0.5PPM तक बनी रहनी चाहिए। इसी का पता आर्थोटोलीडीन विधि से किया जाता है।
D. पेय जल में अवशेष क्लोरीन को पता लगाने के लिए ऑर्थोटॉलिडाइन परीक्षण व स्टार्च आयोडाइड परीक्षण किया जाता है, जबकि क्लोरोमाइन परीक्षण द्वारा अवशेष क्लोरीन का पता नहीं लगाया जाता है। पेयजल में महामारी के दौरान अवशेष क्लोरीन की मात्रा 0.5PPM तक बनी रहनी चाहिए। इसी का पता आर्थोटोलीडीन विधि से किया जाता है।