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Q: Who is considered as the head of Jain asangha after the death of Mahavir? महावीर की मृत्यु के उपरान्त निम्नलिखित में से किसके जैन संघ के प्रमुख बनने का वर्णन है?
  • A. Jambu/जम्बू
  • B. Bhadrabahu/भद्रबाहु
  • C. Sthoolbhadra/स्थूलभद्र
  • D. Sudharman/सुधर्मन
Correct Answer: Option D - महावीर स्वामी ने अपने जीवन-काल में एक संघ की स्थापना की जिसमें 11 प्रमुख अनुयायी शामिल थे। ये अनुयायी ‘गणधर’ कहलाये। इन्हें अलग-अलग समूहों का अध्यक्ष बनाया गया। महावीर की मृत्यु के बाद केवल एक गणधर `सुधर्मन' जीवित बचा जो जैन संघ का अध्यक्ष बना। भद्रबाहु कृत ‘जैन कल्पसूत्र’ से पता चलता है कि महावीर की मृत्यु के बीस वर्षों बाद सुधर्मन की मृत्यु हो गई तथा उसके बाद जम्बू 44 वर्षों तक संघ का अध्यक्ष रहा। अंतिम नंद राजा के समय में सम्भूत विजय तथा भद्रबाहु संघ के अध्यक्ष थे।
D. महावीर स्वामी ने अपने जीवन-काल में एक संघ की स्थापना की जिसमें 11 प्रमुख अनुयायी शामिल थे। ये अनुयायी ‘गणधर’ कहलाये। इन्हें अलग-अलग समूहों का अध्यक्ष बनाया गया। महावीर की मृत्यु के बाद केवल एक गणधर `सुधर्मन' जीवित बचा जो जैन संघ का अध्यक्ष बना। भद्रबाहु कृत ‘जैन कल्पसूत्र’ से पता चलता है कि महावीर की मृत्यु के बीस वर्षों बाद सुधर्मन की मृत्यु हो गई तथा उसके बाद जम्बू 44 वर्षों तक संघ का अध्यक्ष रहा। अंतिम नंद राजा के समय में सम्भूत विजय तथा भद्रबाहु संघ के अध्यक्ष थे।

Explanations:

महावीर स्वामी ने अपने जीवन-काल में एक संघ की स्थापना की जिसमें 11 प्रमुख अनुयायी शामिल थे। ये अनुयायी ‘गणधर’ कहलाये। इन्हें अलग-अलग समूहों का अध्यक्ष बनाया गया। महावीर की मृत्यु के बाद केवल एक गणधर `सुधर्मन' जीवित बचा जो जैन संघ का अध्यक्ष बना। भद्रबाहु कृत ‘जैन कल्पसूत्र’ से पता चलता है कि महावीर की मृत्यु के बीस वर्षों बाद सुधर्मन की मृत्यु हो गई तथा उसके बाद जम्बू 44 वर्षों तक संघ का अध्यक्ष रहा। अंतिम नंद राजा के समय में सम्भूत विजय तथा भद्रबाहु संघ के अध्यक्ष थे।