Correct Answer:
Option C - स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम मूलशंकर था। स्वामी पूर्णानन्द ने 1848 ई. में उन्हें दयानन्द सरस्वती नाम दिया। 1861 ई० में मथुरा में इनकी भेंट अन्धे स्वामी बिरजानन्द से हुई। दयानन्द इनके शिष्य बन गए। इन्होनें अपने धर्म का प्रचार करने के लिए आगरा में इन्होनें पाखण्ड-खण्डिनी पताका फहराई तथा 1875 ई. में बम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की। 1877 ई. में इन्होनें अपना मुख्यालय लाहौर को बनाया। इन्होनें ‘वेदों की ओर लौटो’ एवं ‘भारत भारतीयों के लिए है’ नारा दिया।
C. स्वामी दयानन्द के बचपन का नाम मूलशंकर था। स्वामी पूर्णानन्द ने 1848 ई. में उन्हें दयानन्द सरस्वती नाम दिया। 1861 ई० में मथुरा में इनकी भेंट अन्धे स्वामी बिरजानन्द से हुई। दयानन्द इनके शिष्य बन गए। इन्होनें अपने धर्म का प्रचार करने के लिए आगरा में इन्होनें पाखण्ड-खण्डिनी पताका फहराई तथा 1875 ई. में बम्बई में आर्यसमाज की स्थापना की। 1877 ई. में इन्होनें अपना मुख्यालय लाहौर को बनाया। इन्होनें ‘वेदों की ओर लौटो’ एवं ‘भारत भारतीयों के लिए है’ नारा दिया।