Grandmother distributed some money to her grandchildren, Ram and Rahim. Amount recieved by Ram is 56 less than thrice the amount received by Rahim. If amount received by Ram then find the amount distributed by the grandmother? दादी ने अपने पोते राम और रहीम के बीच कुछ राशि वितरित किए। राम द्वारा प्राप्त की गई राशि रहीम द्वारा प्राप्त राशि की तीन गुना से 56 कम थे। यदि राम द्वारा प्राप्त की गई राशि रु. 22 है तो दादी द्वारा वितरित की गई राशि कितनी थी।
Which of the following is a disadvantage of Hoffman Kiln? निम्नलिखित में से कौन सा हॉफमैन भट्ठा की हानि है?
सही विकल्प का चयन करके, दिए गए पैटर्न के अनुपस्थित भाग को पूरा करें।
Area under the hyetograph represents हाइटोग्राफ के अंतर्गत क्षेत्र दर्शाता है:
Select the most appropriate synonym of the given word. Blunt
एक आदमी पश्चिम की ओर 16 km चलता है; वह दाएं मुड़ता है और 12 km चलता है। वह फिर शुरुआती बिंदु की ओर 12 km चलता है और गंतव्य तक पहुंचता है। वह शुरुआती स्थान से कितनी दूर है?
‘मौक्तिक’ शब्द का तद्भव रूप क्या है?
निम्नलिखित में से किस नदी को बिहार का शोक कहा जाता है?
Euler's equation of motion represents : आयलर के गति का समीकरण निरूपित करता है–
निर्देश- प्रश्न संख्या (177 से 184) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानां उत्तराणि समुचितं विकल्पं चित्वा देयानि- कश्चित् गोमायुर्नाम शृंगाल: क्षुत्क्षामकण्ठ: इतस्तत: परिभ्रमन् वने सैन्यद्वयसंग्रामभूमिमपश्यत् । तस्याञ्च दुन्दुभे: पतितस्य वायुवशात् वल्ली शाखाग्रै: हन्यमानस्य शब्दमशृणोत्। अथ क्षुभितहृदयश्चिन्तयामास। अहो! विनष्टोअस्मि । तद्यावत् न अस्य प्रोच्चारितशब्दस्य दृष्टिगोचरे गच्छामि तावत् अन्यतो व्रजामि। अथवा नैतत् युज्यते सहसैव पितृपैतामहं वनं त्यत्कृम । उक्तञ्च- भये वा यदि वा हर्षे सम्प्राप्ते यो विमर्शयेत् । कृत्यं न कुरुते वेगान्न स सन्तापमाप्नुयात् ।। तत् तावत् जानामि कस्य अयं शब्द:। धैर्य्यमालम्ब्य विमर्शयन् यावत् मन्दं मन्दं गच्छति तावत् दुन्दुभिम् अपश्यत् । स च तं परिज्ञाय समीपं गत्वा स्वयमेव कौतुकात् अताडयत् । भूयश्च हर्षात् अचिन्तयत्। ‘‘अहो! चिरादेतत् अस्माकं महत् भोजनमापतितम्, तत् नूनं प्रभूतमांसमेदोऽसृग्भि: परिपूरितं भविष्यति’’। तत: परुषचर्मावगुंठितं तत्कथमपि विदैरिय्या एकदेशे छिद्रं कृत्वा संहृष्टमना मध्ये प्रविष्ट: परं चर्मविदारणतोदंष्ट्रा भङ्ग: समजनि। अथ निराशीभूत: तत् दारुशेषमवलोक्य श्लोकमेनमपठत् । ‘‘पूर्वमेव मया ज्ञातम्’’ इति। ततो न शब्दमात्रात् भेतव्यम्’’। पिङ्गलक आह- ‘‘भो:! पश्य अयं मम सर्वोऽपि परिग्रहो भयव्याकुलितमना: पलायितुमिच्छति। तत् कथमहं धैर्य्यवष्टम्भं करोमि’’। सोऽब्रवीत् - ‘‘स्वामिन! नैषामेष दोषो यत: स्वामिसदृशा एव भवन्ति भृत्या:’’।
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