Select the most appropriate ANTONYM of the given word. Timid
नीचे दिए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रं.सं. 349-357) के सबसे उचित उत्तर वाले विकल्प चुनिए। क्यों? एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब देने का प्रयास हम माता-पिता हमेशा से करते आए हैं। यह अच्छी बात है कि बच्चे सवाल पूछते हैं। सीखने का इससे बढ़िया कोई और तरीका नहीं हो सकता है। सभी बच्चों के पास सीखने के दो स्रोत होते हैं–कल्पनाशीलता और उत्सुकता। माता-पिता के रूप में आप अपने बच्चे की कल्पनाशीलता व उत्सुकता को बढ़ावा देकर उसे सीखने के आनंद से सराबोर कर सकते हैं। शिक्षण और सीखना महज स्कूल की चारदीवारी के भीतर संपन्न होने वाली रहस्यमय गतिविधियाँ नहीं है। वे तब भी होती हैं, जब माता-पिता और बच्चे बेहद आसान चीजों को साथ-साथ करते हैं। उदाहरण के लिए घुलने वाले कपड़ों के ढेर से मोजों को उनके जोड़ों के हिसाब से छाँटकर गणित और विज्ञान को गुत्थियो सुलक्षा सकते हैं। साथ मिलकर खाना बना सकते हैं, क्योंकि खाना बनाने से गणित और विज्ञान के अलावा अच्छी सेहत को भी सीख मिलती है। एक-दूसरे को कहानियाँ सुना सकते हैं। कहानी सुनाना पढ़ने और लिखने का आधार हैं। उछल-कूद वाले खेलों से बच्चे गिनती सीखते हैं और जीवन-पर्यंत अच्छी सेहत का पाठ भी पढ़ते हैं। बच्चों के साथ मिलकर कुछ करने से आप समझ जाएँगे कि सीखना मनोरंजक और बेहद महत्वपूर्ण क्रिया-कलाप है। किनके ‘क्यों?’ प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास हम करते आए हैं?
बंगाल का पहला अंग्रेजी कारखाना 1651 में _______ नदी के तट पर स्थापित किया गया था।
Full form of MOEMS is- MOEMS का पूर्णरूप है-
The criticle angle for a light ray going from medium a into medium B is α. If the speed to light in medium B is V, then the speed of light in medium A will be माध्यम A से माध्य B मे जाती हुई प्रकाश किरण के लिए क्रान्तिक कोण का मान α है। यदि माध्यम B में प्रकाश का वेग V हो तो माध्यम A में प्रकाश का वेग होगा
प्रत्यायन क्या है?
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Which one of the following is not a compound?
निर्देश- प्रश्न संख्या (177 से 184) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानां उत्तराणि समुचितं विकल्पं चित्वा देयानि- कश्चित् गोमायुर्नाम शृंगाल: क्षुत्क्षामकण्ठ: इतस्तत: परिभ्रमन् वने सैन्यद्वयसंग्रामभूमिमपश्यत् । तस्याञ्च दुन्दुभे: पतितस्य वायुवशात् वल्ली शाखाग्रै: हन्यमानस्य शब्दमशृणोत्। अथ क्षुभितहृदयश्चिन्तयामास। अहो! विनष्टोअस्मि । तद्यावत् न अस्य प्रोच्चारितशब्दस्य दृष्टिगोचरे गच्छामि तावत् अन्यतो व्रजामि। अथवा नैतत् युज्यते सहसैव पितृपैतामहं वनं त्यत्कृम । उक्तञ्च- भये वा यदि वा हर्षे सम्प्राप्ते यो विमर्शयेत् । कृत्यं न कुरुते वेगान्न स सन्तापमाप्नुयात् ।। तत् तावत् जानामि कस्य अयं शब्द:। धैर्य्यमालम्ब्य विमर्शयन् यावत् मन्दं मन्दं गच्छति तावत् दुन्दुभिम् अपश्यत् । स च तं परिज्ञाय समीपं गत्वा स्वयमेव कौतुकात् अताडयत् । भूयश्च हर्षात् अचिन्तयत्। ‘‘अहो! चिरादेतत् अस्माकं महत् भोजनमापतितम्, तत् नूनं प्रभूतमांसमेदोऽसृग्भि: परिपूरितं भविष्यति’’। तत: परुषचर्मावगुंठितं तत्कथमपि विदैरिय्या एकदेशे छिद्रं कृत्वा संहृष्टमना मध्ये प्रविष्ट: परं चर्मविदारणतोदंष्ट्रा भङ्ग: समजनि। अथ निराशीभूत: तत् दारुशेषमवलोक्य श्लोकमेनमपठत् । ‘‘पूर्वमेव मया ज्ञातम्’’ इति। ततो न शब्दमात्रात् भेतव्यम्’’। पिङ्गलक आह- ‘‘भो:! पश्य अयं मम सर्वोऽपि परिग्रहो भयव्याकुलितमना: पलायितुमिच्छति। तत् कथमहं धैर्य्यवष्टम्भं करोमि’’। सोऽब्रवीत् - ‘‘स्वामिन! नैषामेष दोषो यत: स्वामिसदृशा एव भवन्ति भृत्या:’’।सन्तापं क: न प्राप्नुयात् ?
Which media is useful for Illiterate consumers? निरक्षर उपभोक्ताओं के लिए कौन सा माध्यम उपयोगी है?
Explanations:
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