Correct Answer:
Option C - ‘‘योरप का यह अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने वक्रोक्तिवाद ‘वक्रोक्ति: काव्य - जीवितम्’ का ही नया रूप या विलायती उत्थान है।’’ – यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है।
• ‘‘अन्त:करण की वृत्तियों के चित्र का नाम कविता है।’’- कथन आलोचक महावीर प्रसाद द्विवेदी का है।
• ‘‘काव्य तो प्रकृत मानव अनुभूतियों का नैसर्गिक कल्पना के सहारे, ऐसा सौन्दर्यमय चित्रण है जो मनुष्य मात्र में स्वभावत: अनुरूप भावोच्छवास और सौन्दर्य-संवेदन उत्पन्न करता है। इसी सौन्दर्य-संवेदन को भारतीय पारिभाषिक शब्दावली में रस कहते हैं।’’ – नन्द दुलारे वाजपेयी
• ‘‘जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है उसी प्रकार हृदय की यह मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है।’’ – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल
C. ‘‘योरप का यह अभिव्यंजनावाद हमारे यहाँ के पुराने वक्रोक्तिवाद ‘वक्रोक्ति: काव्य - जीवितम्’ का ही नया रूप या विलायती उत्थान है।’’ – यह कथन आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का है।
• ‘‘अन्त:करण की वृत्तियों के चित्र का नाम कविता है।’’- कथन आलोचक महावीर प्रसाद द्विवेदी का है।
• ‘‘काव्य तो प्रकृत मानव अनुभूतियों का नैसर्गिक कल्पना के सहारे, ऐसा सौन्दर्यमय चित्रण है जो मनुष्य मात्र में स्वभावत: अनुरूप भावोच्छवास और सौन्दर्य-संवेदन उत्पन्न करता है। इसी सौन्दर्य-संवेदन को भारतीय पारिभाषिक शब्दावली में रस कहते हैं।’’ – नन्द दुलारे वाजपेयी
• ‘‘जिस प्रकार आत्मा की मुक्तावस्था ज्ञानदशा कहलाती है उसी प्रकार हृदय की यह मुक्तावस्था रसदशा कहलाती है।’’ – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल