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Q: .
  • A. कर्म
  • B. अपादान
  • C. अधिकरण
  • D. सम्प्रदान
Correct Answer: Option C - संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका वाक्य के अन्य शब्दों विशेष कर क्रिया से संबन्ध ज्ञात हो, उसे कारक कहते हैं। कारक को सूचित करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ जो चिह्न लगाये जाते हैं, उन्हें विभक्तियाँ कहते हैं एवं विभक्ति के चिह्न ही कारक चिह्न या परसर्ग है। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ होती है। इनका विवरण निम्न तालिका द्वारा देखा जा सकता है– विभक्ति कारक चिह्न प्रथमा कर्ता ने द्वितीया कर्म को तृतीया करण से, (के द्वारा) चतुर्थी सम्प्रदान को, के लिए पंचमी अपादान से (अलग होने के लिए) षष्ठी सम्बन्ध का, की, के, रे, रा, री सप्तमी अधिकरण में, पर अष्टमी संबोधन हे!, ओ!, अरे! अत: मेरे हाथ में लेखनी है’ में अधिकरण कारक है।
C. संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका वाक्य के अन्य शब्दों विशेष कर क्रिया से संबन्ध ज्ञात हो, उसे कारक कहते हैं। कारक को सूचित करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ जो चिह्न लगाये जाते हैं, उन्हें विभक्तियाँ कहते हैं एवं विभक्ति के चिह्न ही कारक चिह्न या परसर्ग है। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ होती है। इनका विवरण निम्न तालिका द्वारा देखा जा सकता है– विभक्ति कारक चिह्न प्रथमा कर्ता ने द्वितीया कर्म को तृतीया करण से, (के द्वारा) चतुर्थी सम्प्रदान को, के लिए पंचमी अपादान से (अलग होने के लिए) षष्ठी सम्बन्ध का, की, के, रे, रा, री सप्तमी अधिकरण में, पर अष्टमी संबोधन हे!, ओ!, अरे! अत: मेरे हाथ में लेखनी है’ में अधिकरण कारक है।

Explanations:

संज्ञा या सर्वनाम के जिस रूप से उसका वाक्य के अन्य शब्दों विशेष कर क्रिया से संबन्ध ज्ञात हो, उसे कारक कहते हैं। कारक को सूचित करने के लिए संज्ञा या सर्वनाम के साथ जो चिह्न लगाये जाते हैं, उन्हें विभक्तियाँ कहते हैं एवं विभक्ति के चिह्न ही कारक चिह्न या परसर्ग है। हिन्दी में कारकों की संख्या आठ होती है। इनका विवरण निम्न तालिका द्वारा देखा जा सकता है– विभक्ति कारक चिह्न प्रथमा कर्ता ने द्वितीया कर्म को तृतीया करण से, (के द्वारा) चतुर्थी सम्प्रदान को, के लिए पंचमी अपादान से (अलग होने के लिए) षष्ठी सम्बन्ध का, की, के, रे, रा, री सप्तमी अधिकरण में, पर अष्टमी संबोधन हे!, ओ!, अरे! अत: मेरे हाथ में लेखनी है’ में अधिकरण कारक है।