Correct Answer:
Option A - लोंजाइनस उदात्त के पाँच स्रोत मानते हैं, इनका सही अनुक्रम इस प्रकार है –
1. महान विचारों की उद्भावना की क्षमता।
2. प्रबल तथा अन्त:प्रेरित भाव
3. अलंकारों-विचारालंकार और शब्दालंकार का समुचित प्रयोग।
4. भव्य शब्द-योजना
5. रचना की गरिमा और उत्कर्ष का समुचित प्रभाव
• लोंजाइनस ने कहा है, उदात्त महान आत्मा की प्रतिध्वनि है।
• लोंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए ‘प्रतिभा’ को सर्वाधिक महत्व दिया।
• लोंजाइनस उदात्त के तीन अवरोधक मानते हैं –
1. शब्दाडंबर
2. बालिशता
3. भावाडंबर
• अनास्था, अनपेक्षित और अनुचित भावातिरेक भावाडंबर हैं।
A. लोंजाइनस उदात्त के पाँच स्रोत मानते हैं, इनका सही अनुक्रम इस प्रकार है –
1. महान विचारों की उद्भावना की क्षमता।
2. प्रबल तथा अन्त:प्रेरित भाव
3. अलंकारों-विचारालंकार और शब्दालंकार का समुचित प्रयोग।
4. भव्य शब्द-योजना
5. रचना की गरिमा और उत्कर्ष का समुचित प्रभाव
• लोंजाइनस ने कहा है, उदात्त महान आत्मा की प्रतिध्वनि है।
• लोंजाइनस ने उदात्त की उत्पत्ति के लिए ‘प्रतिभा’ को सर्वाधिक महत्व दिया।
• लोंजाइनस उदात्त के तीन अवरोधक मानते हैं –
1. शब्दाडंबर
2. बालिशता
3. भावाडंबर
• अनास्था, अनपेक्षित और अनुचित भावातिरेक भावाडंबर हैं।