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Q: अभिकथन (A) : विष्णुधर्मोत्तर पुराण प्राचीन भारत के दृश्य और मंचीय कला का एक विशालतम प्राचीन भारतीय ग्रंथ है। तर्क (R) : ऐसा इसलिये है क्योंकि इसमें कला के विभिन्न आयाम, जैसे नाट्यकला, संगीत और प्रतिमा-लक्षण वर्णित है।
  • A. दोनों (A) और (R) सही है।
  • B. (A) सही है, लेकिन (R) सही नहीं है।
  • C. (A) सही नहीं है, लेकिन (R) सही हैं।
  • D. दोनों (A) और (R) सही नहीं हैं।
Correct Answer: Option D - विष्णुधर्मोत्तर पुराण को प्राचीन भारत के दृश्य एवं मंचीय कला का विशालतम प्राचीन ग्रंथ नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें कला के विभिन्न आयामों जैसे नाट्य कला, संगीत और प्रतिमा-लक्षण का वर्णन नहीं मिलता, अत: अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही नहीं है।
D. विष्णुधर्मोत्तर पुराण को प्राचीन भारत के दृश्य एवं मंचीय कला का विशालतम प्राचीन ग्रंथ नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें कला के विभिन्न आयामों जैसे नाट्य कला, संगीत और प्रतिमा-लक्षण का वर्णन नहीं मिलता, अत: अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही नहीं है।

Explanations:

विष्णुधर्मोत्तर पुराण को प्राचीन भारत के दृश्य एवं मंचीय कला का विशालतम प्राचीन ग्रंथ नहीं कहा जा सकता क्योंकि इसमें कला के विभिन्न आयामों जैसे नाट्य कला, संगीत और प्रतिमा-लक्षण का वर्णन नहीं मिलता, अत: अभिकथन (A) और तर्क (R) दोनों सही नहीं है।