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Q: हमें आरंभिक कृषकों व पशुपालकों के बारे में कैसे पता चला? A. हमारे पास उस समय का लिखित रिकार्ड है। B. हमारे पास अनाजों और जानवरों की हड्डियों के साक्ष्य हैं।
  • A. केवल (A)
  • B. केवल (B)
  • C. A और B दोनों
  • D. न तो A न ही B
Correct Answer: Option B - हमें आरंभिक कृषकों व पशुपालकों के बारे में जानकारी अनाजों और जानवरों की हड्डियों के साक्ष्य से पता चला है। इन साक्ष्यों से पुरातत्वविदों को कृषकों और पशुपालकों के होने के साक्ष्य मिले हैं, ये पूरे उपमहाद्वीप में पाए गए है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमोत्तर क्षेत्र में, आधुनिक कश्मीर में और पूर्वी तथा दक्षिण भारत में पाए गए है। वास्तव में ये स्थान कृषकों और पशुपालकों की बस्तियाँ थी या नही इसे जाँचने के लिये वैज्ञानिक खुदाई में मिले पौधों और पशुओं की हड्डियों के नखूनों का अध्ययन करते हैं। उपमहाद्वीप के भिन्न - भिन्न इलाकों में गेहूँ, जौ और धान प्राकृतिक रूप से उगने लगे थे बाद में महिलाओं-पुरुषों ने इसे इकट्ठा किया। साथ ही वे यह भी सीखने लगे होंगे कि यह अनाज कहा उगते थे और कब पककर तैयार होते थे। इसके पश्चात वे स्वमं कृषि करना सीख गये।
B. हमें आरंभिक कृषकों व पशुपालकों के बारे में जानकारी अनाजों और जानवरों की हड्डियों के साक्ष्य से पता चला है। इन साक्ष्यों से पुरातत्वविदों को कृषकों और पशुपालकों के होने के साक्ष्य मिले हैं, ये पूरे उपमहाद्वीप में पाए गए है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमोत्तर क्षेत्र में, आधुनिक कश्मीर में और पूर्वी तथा दक्षिण भारत में पाए गए है। वास्तव में ये स्थान कृषकों और पशुपालकों की बस्तियाँ थी या नही इसे जाँचने के लिये वैज्ञानिक खुदाई में मिले पौधों और पशुओं की हड्डियों के नखूनों का अध्ययन करते हैं। उपमहाद्वीप के भिन्न - भिन्न इलाकों में गेहूँ, जौ और धान प्राकृतिक रूप से उगने लगे थे बाद में महिलाओं-पुरुषों ने इसे इकट्ठा किया। साथ ही वे यह भी सीखने लगे होंगे कि यह अनाज कहा उगते थे और कब पककर तैयार होते थे। इसके पश्चात वे स्वमं कृषि करना सीख गये।

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हमें आरंभिक कृषकों व पशुपालकों के बारे में जानकारी अनाजों और जानवरों की हड्डियों के साक्ष्य से पता चला है। इन साक्ष्यों से पुरातत्वविदों को कृषकों और पशुपालकों के होने के साक्ष्य मिले हैं, ये पूरे उपमहाद्वीप में पाए गए है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमोत्तर क्षेत्र में, आधुनिक कश्मीर में और पूर्वी तथा दक्षिण भारत में पाए गए है। वास्तव में ये स्थान कृषकों और पशुपालकों की बस्तियाँ थी या नही इसे जाँचने के लिये वैज्ञानिक खुदाई में मिले पौधों और पशुओं की हड्डियों के नखूनों का अध्ययन करते हैं। उपमहाद्वीप के भिन्न - भिन्न इलाकों में गेहूँ, जौ और धान प्राकृतिक रूप से उगने लगे थे बाद में महिलाओं-पुरुषों ने इसे इकट्ठा किया। साथ ही वे यह भी सीखने लगे होंगे कि यह अनाज कहा उगते थे और कब पककर तैयार होते थे। इसके पश्चात वे स्वमं कृषि करना सीख गये।