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Q: किस ग्रन्थ की गणना बृहत्त्रयी के अन्तर्गत नहीं है
  • A. किरातार्जुनीय
  • B. शिशुपालवध
  • C. नैषधीयचरित
  • D. रघुवंश
Correct Answer: Option D - रघुवंश ग्रन्थ की गणना बृहत्त्रयी के अन्तर्गत नहीं है। बृहत्त्रयी - बृहत्त्रयी में किरातार्जुनीय, शिशुपालवध और नैषधीयचरित इस तीन महाकाव्यों का नाम स्मरण किया जाता है। इस चमत्कारपूर्ण शैली के ये महाकाव्य संस्कृत साहित्य में सर्वश्रेष्ठ हैं। लघुत्रयी- रघुवंश, कुमारसम्भव तथा मेघदूत ये तीन लघुत्रयी के अन्तर्गत आते हैं। रघुवंश महाकाव्य 19 सर्गों का एक उत्कृष्ट काव्य है। इसमें कवि की परिपक्व प्रज्ञता और प्रौढ़ प्रतिभा दृष्टिगोचर होती है।
D. रघुवंश ग्रन्थ की गणना बृहत्त्रयी के अन्तर्गत नहीं है। बृहत्त्रयी - बृहत्त्रयी में किरातार्जुनीय, शिशुपालवध और नैषधीयचरित इस तीन महाकाव्यों का नाम स्मरण किया जाता है। इस चमत्कारपूर्ण शैली के ये महाकाव्य संस्कृत साहित्य में सर्वश्रेष्ठ हैं। लघुत्रयी- रघुवंश, कुमारसम्भव तथा मेघदूत ये तीन लघुत्रयी के अन्तर्गत आते हैं। रघुवंश महाकाव्य 19 सर्गों का एक उत्कृष्ट काव्य है। इसमें कवि की परिपक्व प्रज्ञता और प्रौढ़ प्रतिभा दृष्टिगोचर होती है।

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रघुवंश ग्रन्थ की गणना बृहत्त्रयी के अन्तर्गत नहीं है। बृहत्त्रयी - बृहत्त्रयी में किरातार्जुनीय, शिशुपालवध और नैषधीयचरित इस तीन महाकाव्यों का नाम स्मरण किया जाता है। इस चमत्कारपूर्ण शैली के ये महाकाव्य संस्कृत साहित्य में सर्वश्रेष्ठ हैं। लघुत्रयी- रघुवंश, कुमारसम्भव तथा मेघदूत ये तीन लघुत्रयी के अन्तर्गत आते हैं। रघुवंश महाकाव्य 19 सर्गों का एक उत्कृष्ट काव्य है। इसमें कवि की परिपक्व प्रज्ञता और प्रौढ़ प्रतिभा दृष्टिगोचर होती है।