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Q: काव्यप्रकाशे ‘उपकृतं बहु तत्र किमुच्यते सुजनता प्रथिता भवता परम्’ इति श्लोको निर्दिष्ट उदाहरणरूपेण
  • A. अर्थान्तरसंक्रमितवाच्यध्वने:
  • B. अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वने:
  • C. संलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्यध्वने:
  • D. असंलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्यध्वने:
Correct Answer: Option B - काव्यप्रकाशे ‘उपकृतं बहु तत्र किमुच्यते सुजनता प्रथिता भवता परम्’ इति श्लोको निर्दिष्ट अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वने: उदाहरणरूपेण। अर्थात् काव्य प्रकाश में यह श्लोक अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वनि के उदाहरण रूप में निर्दिष्ट है। ध्वनि के मुख्यत: दो भेद (1) अविवक्षित वाच्य ध्वनि (लक्षणामूला ध्वनि), (2) विवक्षितवाच्य ध्वनि (अभिधामूला ध्वनि)। अविवक्षितवाच्य ध्वनि में वाच्य (विवक्षित न होकर) या तो अर्थान्तर में संक्रमित या अत्यन्त तिरस्कृत हो जाता है जिससे अर्थान्तरसंक्रमित और अत्यन्ततिरस्कृत रूप से दो भेद हो जाते हैं तथा विवक्षित वाच्य ध्वनि (अभिधामूला ध्वनि) के (1) संलक्ष्यकमव्यङ्गय (2) असंलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य होकर पुन: असंलक्ष्यकमव्यङ्ग्य के भेदोपभेद 15 भेद होकर (15 + 3 = 18) ध्वनिकाव्य के 18 भेद होते हैं। अत: उपकृतं का तात्पर्य उपकार न होकर अपकार होने से वाच्य अत्यन्त तिरस्कृत हुआ जिससे विकल्प (b) सही है।
B. काव्यप्रकाशे ‘उपकृतं बहु तत्र किमुच्यते सुजनता प्रथिता भवता परम्’ इति श्लोको निर्दिष्ट अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वने: उदाहरणरूपेण। अर्थात् काव्य प्रकाश में यह श्लोक अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वनि के उदाहरण रूप में निर्दिष्ट है। ध्वनि के मुख्यत: दो भेद (1) अविवक्षित वाच्य ध्वनि (लक्षणामूला ध्वनि), (2) विवक्षितवाच्य ध्वनि (अभिधामूला ध्वनि)। अविवक्षितवाच्य ध्वनि में वाच्य (विवक्षित न होकर) या तो अर्थान्तर में संक्रमित या अत्यन्त तिरस्कृत हो जाता है जिससे अर्थान्तरसंक्रमित और अत्यन्ततिरस्कृत रूप से दो भेद हो जाते हैं तथा विवक्षित वाच्य ध्वनि (अभिधामूला ध्वनि) के (1) संलक्ष्यकमव्यङ्गय (2) असंलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य होकर पुन: असंलक्ष्यकमव्यङ्ग्य के भेदोपभेद 15 भेद होकर (15 + 3 = 18) ध्वनिकाव्य के 18 भेद होते हैं। अत: उपकृतं का तात्पर्य उपकार न होकर अपकार होने से वाच्य अत्यन्त तिरस्कृत हुआ जिससे विकल्प (b) सही है।

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काव्यप्रकाशे ‘उपकृतं बहु तत्र किमुच्यते सुजनता प्रथिता भवता परम्’ इति श्लोको निर्दिष्ट अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वने: उदाहरणरूपेण। अर्थात् काव्य प्रकाश में यह श्लोक अत्यन्ततिरस्कृतवाच्यध्वनि के उदाहरण रूप में निर्दिष्ट है। ध्वनि के मुख्यत: दो भेद (1) अविवक्षित वाच्य ध्वनि (लक्षणामूला ध्वनि), (2) विवक्षितवाच्य ध्वनि (अभिधामूला ध्वनि)। अविवक्षितवाच्य ध्वनि में वाच्य (विवक्षित न होकर) या तो अर्थान्तर में संक्रमित या अत्यन्त तिरस्कृत हो जाता है जिससे अर्थान्तरसंक्रमित और अत्यन्ततिरस्कृत रूप से दो भेद हो जाते हैं तथा विवक्षित वाच्य ध्वनि (अभिधामूला ध्वनि) के (1) संलक्ष्यकमव्यङ्गय (2) असंलक्ष्यक्रमव्यङ्ग्य होकर पुन: असंलक्ष्यकमव्यङ्ग्य के भेदोपभेद 15 भेद होकर (15 + 3 = 18) ध्वनिकाव्य के 18 भेद होते हैं। अत: उपकृतं का तात्पर्य उपकार न होकर अपकार होने से वाच्य अत्यन्त तिरस्कृत हुआ जिससे विकल्प (b) सही है।