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Q: मिश्र बंधुओं की पुस्तक ‘हिन्दी नवरत्न’ में इनमें से किस कवि को स्थान नहीं मिला?
  • A. मतिराम
  • B. देव
  • C. जायसी
  • D. सूर
Correct Answer: Option C - मिश्र बन्धुओं की पुस्तक ‘हिन्दी नवरत्न’ में कवि ‘जायसी’ को स्थान नहीं मिला। मिश्र बंधुओं का ‘हिंदी नवरत्न’ एक लम्बी भूमिका और नौ अध्यायों में विभाजित है, जिनमें मध्यकाल से लेकर आधुनिक काल तक के एक-एक कवि को रखा गया है जिनका क्रम इस प्रकार है– 1. गोस्वामी तुलसीदास, 2. महात्मा सूरदास, 3. महाकवि देवदत्त, 4. महाकवि बिहारीलाल, 5. त्रिपाठी बंधु (महाकवि भूषण, मतिराम), 6. केशवदास, 7. कबीर, 8. चंदबरदाई, 9. भारतेन्दु हरिश्चंद्र। इसी क्रम के आधार पर मिश्रबंधुओं ने कवियों की तीन त्रयी बनायी– मिश्रबंधओं की वृहदत्रयी : तुलसीदास, सूरदास, देव मिश्रबंधुओं की मध्यत्रयी : बिहारी, भूषण, केशव मिश्रबंधुओं की लघुत्रयी : मतिराम, चंदबरदाई, हरिश्चंद्र ‘‘नवरत्न’’ नाम की सार्धकता बनाये रखने के लिये मिश्र बंधुओं ने ‘भूषण’ और मतिराम को ‘त्रिपाठी बंधु’ कहकर एक ही मान लिया।
C. मिश्र बन्धुओं की पुस्तक ‘हिन्दी नवरत्न’ में कवि ‘जायसी’ को स्थान नहीं मिला। मिश्र बंधुओं का ‘हिंदी नवरत्न’ एक लम्बी भूमिका और नौ अध्यायों में विभाजित है, जिनमें मध्यकाल से लेकर आधुनिक काल तक के एक-एक कवि को रखा गया है जिनका क्रम इस प्रकार है– 1. गोस्वामी तुलसीदास, 2. महात्मा सूरदास, 3. महाकवि देवदत्त, 4. महाकवि बिहारीलाल, 5. त्रिपाठी बंधु (महाकवि भूषण, मतिराम), 6. केशवदास, 7. कबीर, 8. चंदबरदाई, 9. भारतेन्दु हरिश्चंद्र। इसी क्रम के आधार पर मिश्रबंधुओं ने कवियों की तीन त्रयी बनायी– मिश्रबंधओं की वृहदत्रयी : तुलसीदास, सूरदास, देव मिश्रबंधुओं की मध्यत्रयी : बिहारी, भूषण, केशव मिश्रबंधुओं की लघुत्रयी : मतिराम, चंदबरदाई, हरिश्चंद्र ‘‘नवरत्न’’ नाम की सार्धकता बनाये रखने के लिये मिश्र बंधुओं ने ‘भूषण’ और मतिराम को ‘त्रिपाठी बंधु’ कहकर एक ही मान लिया।

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मिश्र बन्धुओं की पुस्तक ‘हिन्दी नवरत्न’ में कवि ‘जायसी’ को स्थान नहीं मिला। मिश्र बंधुओं का ‘हिंदी नवरत्न’ एक लम्बी भूमिका और नौ अध्यायों में विभाजित है, जिनमें मध्यकाल से लेकर आधुनिक काल तक के एक-एक कवि को रखा गया है जिनका क्रम इस प्रकार है– 1. गोस्वामी तुलसीदास, 2. महात्मा सूरदास, 3. महाकवि देवदत्त, 4. महाकवि बिहारीलाल, 5. त्रिपाठी बंधु (महाकवि भूषण, मतिराम), 6. केशवदास, 7. कबीर, 8. चंदबरदाई, 9. भारतेन्दु हरिश्चंद्र। इसी क्रम के आधार पर मिश्रबंधुओं ने कवियों की तीन त्रयी बनायी– मिश्रबंधओं की वृहदत्रयी : तुलसीदास, सूरदास, देव मिश्रबंधुओं की मध्यत्रयी : बिहारी, भूषण, केशव मिश्रबंधुओं की लघुत्रयी : मतिराम, चंदबरदाई, हरिश्चंद्र ‘‘नवरत्न’’ नाम की सार्धकता बनाये रखने के लिये मिश्र बंधुओं ने ‘भूषण’ और मतिराम को ‘त्रिपाठी बंधु’ कहकर एक ही मान लिया।