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Q: निम्नलिखित कथनों की जाँच कीजिये और नीचे दिये गये कोड का इस्तेमाल करके सही उत्तर का चयन कीजिए। 1. सूर्य की सतह पर मौजूद काले धब्बों को सनस्पॉट कहा जाता है। 2. सनस्पॉट अंधेरे क्षेत्रों के रूप में दिखाई देते हैं क्योंकि वे अपने आसपास के वर्णमण्डल से लगभग 1500⁰C ठंडे होते हैं। 3. एक अकेला सनस्पॉट कुछ दिनों से कुछ महीनों तक रह सकता है। 4. दिखाई देने वाले सनस्पॉटों की संख्या 11 साल के चक्र में घटती-बढ़ती है। कोड :
  • A. 1, 2 और 3 सही हैं
  • B. 2, 3 और 4 सही हैं
  • C. 1, 3 और 4 सही हैं
  • D. 1, 2, 3 और 4 सही हैं
Correct Answer: Option D - सूर्य की सतह पर मौजूद काले धब्बों को सनस्पॉट (सौर कलंक) कहा जाता है। सनस्पॉट अंधेरे क्षेत्रों के रूप में दिखाई देते है क्योंकि वे अपने आस-पास के वर्णमण्डल से लगभग 1500⁰C ठंडे होते हैं। एक अकेला सनस्पॉट कुछ दिनों से कुछ महीनों तक रह सकते हैं। दिखाई देने वाले सनस्पॉटों की संख्या 11 साल के चक्र में घटती-बढ़ती है। सूर्य अत्यधिक गर्म गैस का पिण्ड है जिसके पृष्ठ का तापमान 6000⁰C है। सूर्य के तल से ऊष्मा निरन्तर लघु तरंगों के रूप में विकिरित होती रहती है। सूर्य से विकिरित होने वाले इस ताप को सूर्यताप कहते हैं।
D. सूर्य की सतह पर मौजूद काले धब्बों को सनस्पॉट (सौर कलंक) कहा जाता है। सनस्पॉट अंधेरे क्षेत्रों के रूप में दिखाई देते है क्योंकि वे अपने आस-पास के वर्णमण्डल से लगभग 1500⁰C ठंडे होते हैं। एक अकेला सनस्पॉट कुछ दिनों से कुछ महीनों तक रह सकते हैं। दिखाई देने वाले सनस्पॉटों की संख्या 11 साल के चक्र में घटती-बढ़ती है। सूर्य अत्यधिक गर्म गैस का पिण्ड है जिसके पृष्ठ का तापमान 6000⁰C है। सूर्य के तल से ऊष्मा निरन्तर लघु तरंगों के रूप में विकिरित होती रहती है। सूर्य से विकिरित होने वाले इस ताप को सूर्यताप कहते हैं।

Explanations:

सूर्य की सतह पर मौजूद काले धब्बों को सनस्पॉट (सौर कलंक) कहा जाता है। सनस्पॉट अंधेरे क्षेत्रों के रूप में दिखाई देते है क्योंकि वे अपने आस-पास के वर्णमण्डल से लगभग 1500⁰C ठंडे होते हैं। एक अकेला सनस्पॉट कुछ दिनों से कुछ महीनों तक रह सकते हैं। दिखाई देने वाले सनस्पॉटों की संख्या 11 साल के चक्र में घटती-बढ़ती है। सूर्य अत्यधिक गर्म गैस का पिण्ड है जिसके पृष्ठ का तापमान 6000⁰C है। सूर्य के तल से ऊष्मा निरन्तर लघु तरंगों के रूप में विकिरित होती रहती है। सूर्य से विकिरित होने वाले इस ताप को सूर्यताप कहते हैं।