Correct Answer:
Option B - ‘विकास की कोई विशिष्ट दिशा नहीं होता है’ यह विकास के सिद्धान्त के अन्तर्गत नहीं है। मानव विकास के सिद्धान्त को उस रूप में परिभाषित किया जाता है जिस तरीके में एक व्यक्ति विकसित होगा। विकास के कई सिद्धान्त है जिसमें से एक ‘क्रमिकता का सिद्धान्त’ है इस सिद्धान्त के अन्य दो रूप है, सिफेलोकॉडल प्रवृत्ति एवं ‘प्रोक्सिमो-डिस्टल’। इसके अलावा निरंतरता का सिद्धान्त, व्यक्तिगत अंतर, पारस्परिक संबंध, सामान्य से विशिष्ट, परस्पर क्रिया, दर में विभेदन, एकीकरण और पूर्वानुमेयता है।
B. ‘विकास की कोई विशिष्ट दिशा नहीं होता है’ यह विकास के सिद्धान्त के अन्तर्गत नहीं है। मानव विकास के सिद्धान्त को उस रूप में परिभाषित किया जाता है जिस तरीके में एक व्यक्ति विकसित होगा। विकास के कई सिद्धान्त है जिसमें से एक ‘क्रमिकता का सिद्धान्त’ है इस सिद्धान्त के अन्य दो रूप है, सिफेलोकॉडल प्रवृत्ति एवं ‘प्रोक्सिमो-डिस्टल’। इसके अलावा निरंतरता का सिद्धान्त, व्यक्तिगत अंतर, पारस्परिक संबंध, सामान्य से विशिष्ट, परस्पर क्रिया, दर में विभेदन, एकीकरण और पूर्वानुमेयता है।