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Q: निम्नलिखित में से किस ग्रंथ में कहा गया है कि वे जो संस्कृत भाषा शुद्ध नहीं बोल सकते थे उन्हें ‘म्लेच्छ’ कहा जाता था?
  • A. श्वेताश्वर उपनिषद्
  • B. गोपथ ब्राह्मण
  • C. वृहदारण्यक उपनिषद्
  • D. शतपथ ब्राह्मण
Correct Answer: Option D - शुक्ल यजुर्वेद के ब्राह्मणग्रन्थ ‘शतपथ ब्राह्मण’ में इस कथन का उल्लेख है कि वे जो संस्कृत भाषा शुद्ध नहीं बोल सकते थे, उन्हें ‘म्लेच्छ’ कहा जाता था। याज्ञवल्क्य द्वारा रचित ब्राह्मण ग्रन्थों में इसे सर्वाधिक प्रामाणिक माना जाता है। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्म के दो रूप थे- मूर्त और अमूर्त। इन्हें ‘यत’ और ‘त्यत’ अर्थात सत्य और असत्य भी कहा जाता है। शतपथ ब्राह्मण में 14 काण्ड हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के यज्ञों का पूर्ण एवं विस्तृत अध्ययन भी मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में म्लेच्छ से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से भी है जो नीच, पापी, दुष्ट, सदाचार का पालन न करने वाला तथा दूसरे देशों से आया, वह व्यक्ति जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र से अलग हो।
D. शुक्ल यजुर्वेद के ब्राह्मणग्रन्थ ‘शतपथ ब्राह्मण’ में इस कथन का उल्लेख है कि वे जो संस्कृत भाषा शुद्ध नहीं बोल सकते थे, उन्हें ‘म्लेच्छ’ कहा जाता था। याज्ञवल्क्य द्वारा रचित ब्राह्मण ग्रन्थों में इसे सर्वाधिक प्रामाणिक माना जाता है। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्म के दो रूप थे- मूर्त और अमूर्त। इन्हें ‘यत’ और ‘त्यत’ अर्थात सत्य और असत्य भी कहा जाता है। शतपथ ब्राह्मण में 14 काण्ड हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के यज्ञों का पूर्ण एवं विस्तृत अध्ययन भी मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में म्लेच्छ से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से भी है जो नीच, पापी, दुष्ट, सदाचार का पालन न करने वाला तथा दूसरे देशों से आया, वह व्यक्ति जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र से अलग हो।

Explanations:

शुक्ल यजुर्वेद के ब्राह्मणग्रन्थ ‘शतपथ ब्राह्मण’ में इस कथन का उल्लेख है कि वे जो संस्कृत भाषा शुद्ध नहीं बोल सकते थे, उन्हें ‘म्लेच्छ’ कहा जाता था। याज्ञवल्क्य द्वारा रचित ब्राह्मण ग्रन्थों में इसे सर्वाधिक प्रामाणिक माना जाता है। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार सृष्टि के प्रारम्भ में ब्रह्म के दो रूप थे- मूर्त और अमूर्त। इन्हें ‘यत’ और ‘त्यत’ अर्थात सत्य और असत्य भी कहा जाता है। शतपथ ब्राह्मण में 14 काण्ड हैं जिसमें विभिन्न प्रकार के यज्ञों का पूर्ण एवं विस्तृत अध्ययन भी मिलता है। शतपथ ब्राह्मण में म्लेच्छ से अभिप्राय ऐसे व्यक्ति से भी है जो नीच, पापी, दुष्ट, सदाचार का पालन न करने वाला तथा दूसरे देशों से आया, वह व्यक्ति जो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र से अलग हो।