Correct Answer:
Option C - जीन पियाजे के अनुसार औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11-15 वर्ष) में बालक अमूर्त बातों के सम्बन्ध में तार्किक चिंतन करने की योग्यता विकसित करता है। औपचारिक संक्रियात्मक विचार बालकों को वास्तविकता से बाहर जाने तथा सम्भावनाओं पर विचार करने योग्य बनाते है।
C. जीन पियाजे के अनुसार औपचारिक संक्रियात्मक अवस्था (11-15 वर्ष) में बालक अमूर्त बातों के सम्बन्ध में तार्किक चिंतन करने की योग्यता विकसित करता है। औपचारिक संक्रियात्मक विचार बालकों को वास्तविकता से बाहर जाने तथा सम्भावनाओं पर विचार करने योग्य बनाते है।