Correct Answer:
Option D - रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना दिये गये विकल्पों में उपर्युक्त में से एक से अधिक है।
⇒ तुलसीदास (1938) निराला कृत 101 छन्दों में लिखित खण्ड काव्य है, जिसमें कवि तुलसीदास के गृहत्याग एवं तप की घटना का वर्णन है।
⇒ यशोधरा (1932) मैथिलीशरण गुप्त कृत चरित्रात्मक खण्डकाव्य है। यशोधरा काव्य गौतम बुद्ध के गृहत्याग की घटना पर आधारित है।
⇒ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के काव्य में राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना तथा प्रगतिवादी चेतना दोनों विद्यमान है। दिनकर को ‘समय-सूर्य’ तथा ‘अधैर्य का कवि’ कहा जाता है। दिनकर को ‘उर्वशी’ महाकाव्य के लिए सन 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इसे गीति-नाट्य भी माना जाता है।
⇒ दिनकर की आरम्भिक रचनाओं ‘रेणुका’ और हुंकार को लेकर तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने दिनकर से स्पष्टीकरण मांगा था।
⇒ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचनाएँ-रेणुका (1935), हुंकार (1938), रसवंती (1940), द्वंद्वगीत (1940), कुरूक्षेत्र (1946), समाधेनी (1947), धूम और धुआँ (1951), इतिहास के आँसू (1951), रश्मिरथी (1952), नीलकुसुम (1954), दिल्ली (1954), नीम के पत्ते (1954), उर्वशी (1961), परशुराम की प्रतीक्षा (1963), आत्मा की आँखे (1964), हारे को हरिनाम (1970)।
⇒ कुरूक्षेत्र की कथावस्तु महाभारत के शांतिपर्व से प्रभावित है। यह रचना मूलत: महाभारत के भीष्म-युधिष्ठिर संवाद पर आधारित है।
D. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचना दिये गये विकल्पों में उपर्युक्त में से एक से अधिक है।
⇒ तुलसीदास (1938) निराला कृत 101 छन्दों में लिखित खण्ड काव्य है, जिसमें कवि तुलसीदास के गृहत्याग एवं तप की घटना का वर्णन है।
⇒ यशोधरा (1932) मैथिलीशरण गुप्त कृत चरित्रात्मक खण्डकाव्य है। यशोधरा काव्य गौतम बुद्ध के गृहत्याग की घटना पर आधारित है।
⇒ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के काव्य में राष्ट्रीय सांस्कृतिक चेतना तथा प्रगतिवादी चेतना दोनों विद्यमान है। दिनकर को ‘समय-सूर्य’ तथा ‘अधैर्य का कवि’ कहा जाता है। दिनकर को ‘उर्वशी’ महाकाव्य के लिए सन 1972 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया। इसे गीति-नाट्य भी माना जाता है।
⇒ दिनकर की आरम्भिक रचनाओं ‘रेणुका’ और हुंकार को लेकर तत्कालीन अंग्रेजी सरकार ने दिनकर से स्पष्टीकरण मांगा था।
⇒ रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचनाएँ-रेणुका (1935), हुंकार (1938), रसवंती (1940), द्वंद्वगीत (1940), कुरूक्षेत्र (1946), समाधेनी (1947), धूम और धुआँ (1951), इतिहास के आँसू (1951), रश्मिरथी (1952), नीलकुसुम (1954), दिल्ली (1954), नीम के पत्ते (1954), उर्वशी (1961), परशुराम की प्रतीक्षा (1963), आत्मा की आँखे (1964), हारे को हरिनाम (1970)।
⇒ कुरूक्षेत्र की कथावस्तु महाभारत के शांतिपर्व से प्रभावित है। यह रचना मूलत: महाभारत के भीष्म-युधिष्ठिर संवाद पर आधारित है।