Correct Answer:
Option D - जब पतले बेलन में आंतरिक द्रव का दाब लगता है तब बेलन में तनन परिधीय प्रतिबल (Tensile circumfential stress) उत्पन्न होता है जो कि अनुदैर्ध्य प्रतिबल का दोगुना होता है, इसलिए बेलन के अनुदैर्ध्य फटने (Longitudinal bursting) की ज्यादा सम्भावना होती है।
इसलिए हमें बेलन के ऊपर पतले तार लपेटकर (wire winding) या स्ट्रैपिंग (Strapping) द्वारा इसकी सामर्थ्य बढ़ाते हैं जिसके द्वारा हम निम्न उद्देश्य पूरे करते हैं-
(i) बेलन की दाब वहन करने की क्षमता बढ़ाता है।
(ii) बेलन के अनुदैर्ध्य फटने (Longitudinal bursting) को कम करता है।
D. जब पतले बेलन में आंतरिक द्रव का दाब लगता है तब बेलन में तनन परिधीय प्रतिबल (Tensile circumfential stress) उत्पन्न होता है जो कि अनुदैर्ध्य प्रतिबल का दोगुना होता है, इसलिए बेलन के अनुदैर्ध्य फटने (Longitudinal bursting) की ज्यादा सम्भावना होती है।
इसलिए हमें बेलन के ऊपर पतले तार लपेटकर (wire winding) या स्ट्रैपिंग (Strapping) द्वारा इसकी सामर्थ्य बढ़ाते हैं जिसके द्वारा हम निम्न उद्देश्य पूरे करते हैं-
(i) बेलन की दाब वहन करने की क्षमता बढ़ाता है।
(ii) बेलन के अनुदैर्ध्य फटने (Longitudinal bursting) को कम करता है।