What is the chemical symbol of acetylene gas? एसिटिलीन गैस का रासायनिक प्रतीक क्या है?
विश्व पर्यावरण दिवस हर साल मनाया जाता है–
There were two battles fought between Muhammad Ghori's forces and Prithviraj Chauhan, in which Prithviraj Chauhan lost the second battle of ____ and his Kingdom was captured.
Identify the segment in the sentence which contains the grammatical error. Despite of working hard he failed the test.
केन्द्रीय आर्थिक सर्वेक्षण 2017-18 के अनुसार पंचायतों को अपने राजस्व का कितना प्रतिशत भाग केन्द्र एवं राज्य से हस्तांतरण से प्राप्त होता है?
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2024 में अर्थशास्त्र का नोबेल पुरस्कार किसे मिला है?
Reforms were introduced in China in
दी गई श्रेणी में अगला पद ज्ञात करें। 61, 71, 91, 121, 161, 211, ?
निर्देश–नीचे दिए गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (1 से 9 तक) के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए– मानव के मर्मस्थल में परोपकार और त्याग जैसे सद्गुणों की जागृति तभी हो पाती है, जब वह अपने तुच्छ भौतिक जीवन को नगण्य समझकर उत्साह-उमंग के साथ दूसरों की सेवा-सुश्रूषा तथा सत्कार करता है। यह कठोर सत्य है कि हम भौतिक रूप में इस संसार में सीमित अवधि तक ही रहेंगे। हमारी मृत्यु के बाद हमारे निकट सम्बन्धी, मित्र, बन्धु-बांधव जीवनभर हमारे लिए शोकाकुल और प्रेमाकुल भी नहीं रहेंगे। दुख मिश्रित इस निर्बल भावना पर विजय पाने के लिए तब हमारे अन्तर्मन में एक विचार उठता है कि क्यों न हम अपने सत्कर्मों और सद्गुणों का प्रकाश फैलाकर सदा-सदा के लिए अमर हो जाएँ। सेवक-प्रवृत्ति अपनाकर हम ऐसा अवश्य कर सकते हैं। अपने नि:स्वार्थ व्यक्तित्व और परहित कर्मों के बल पर हम हमेशा के लिए मानव जीवन हेतु उत्प्रेरणा बन सकते हैं। अनुपम मनुष्य जीवन को सद्गति प्रदान करने के लिए यह विचार नया नहीं है। ऐसे विचार सज्जन मनुष्यों के अन्तर्मन में सदा उठते रहे हैं तथा इन्हें अपनाकर वे दुनिया में अमर भी हो गए। इस धरा पर स्थायी रूप में नहीं रहने पर भी ऐसे परहितकारी कालांतर तक पूजे जाते रहेंगे। अमूल्य मनुष्य जीवन की सर्वश्रेष्ठ शिक्षा यही है। यही सीखकर मनुष्य का जीवन आनंदमय और समृद्धिशाली हो सकता है। यदि इस प्रकार मानव जीवन उन्नत होता है तो यह संपूर्ण संसार स्वर्गिक विस्तार ग्रहण कर लेगा। किसी भी मानव को अध्यात्मिकता का जो अंतिम ज्ञान मिलेगा, वह भी यही शिक्षा देगा कि धर्म-कर्म का उद्देश्य सत्कर्मों और सद्गुणों की ज्योति फैलाना ही है। शेष शब्दों से भिन्न शब्द पहचानिए–
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