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Q: वह कौन सी अवस्था है जिसमें बच्चे परिवार से स्वायत्तता स्थापित करते हैं और अपने व्यक्तिगत मूल्यों एवं लक्ष्यों को परिभाषित करते हुए अपनी खुद की एक पहचान का निर्माण करते हैं?
  • A. प्रारंभिक बाल्यावस्था
  • B. मध्य बाल्यावस्था
  • C. उत्तर बाल्यावस्था
  • D. किशोरावस्था
Correct Answer: Option D - किशोरावस्था में बच्चे परिवार से स्वायत्तता स्थापित करते हैं और अपने व्यक्तिगत मूल्यों एवं लक्ष्यों को परिभाषित करते हुए अपनी खुद की एक पहचान का निर्माण करते हैं। विद्वानों ने (13-21) वर्ष की अवस्था को किशोरावस्था माना है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था यौनिक परिपक्वता से प्रारम्भ होती है और वैधानिक परिपक्वता पर समाप्त हो जाती है। परिवर्तन की इस अवस्था में माता पिता, शिक्षक, अभिभावक तथा अन्य लोग जो बालकों के कल्याण में रुचि रखते हैं और परिवार समाज व राष्ट्र की प्रगति चाहते हैं तो उन्हें किशोरों के विकास पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिये क्योंकि किशोर ही वर्तमान की शक्ति और भविष्य की आशा है। स्टेनले हॉल के अनुसार, ‘‘किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तूफान व विरोध की अवस्था है।’’
D. किशोरावस्था में बच्चे परिवार से स्वायत्तता स्थापित करते हैं और अपने व्यक्तिगत मूल्यों एवं लक्ष्यों को परिभाषित करते हुए अपनी खुद की एक पहचान का निर्माण करते हैं। विद्वानों ने (13-21) वर्ष की अवस्था को किशोरावस्था माना है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था यौनिक परिपक्वता से प्रारम्भ होती है और वैधानिक परिपक्वता पर समाप्त हो जाती है। परिवर्तन की इस अवस्था में माता पिता, शिक्षक, अभिभावक तथा अन्य लोग जो बालकों के कल्याण में रुचि रखते हैं और परिवार समाज व राष्ट्र की प्रगति चाहते हैं तो उन्हें किशोरों के विकास पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिये क्योंकि किशोर ही वर्तमान की शक्ति और भविष्य की आशा है। स्टेनले हॉल के अनुसार, ‘‘किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तूफान व विरोध की अवस्था है।’’

Explanations:

किशोरावस्था में बच्चे परिवार से स्वायत्तता स्थापित करते हैं और अपने व्यक्तिगत मूल्यों एवं लक्ष्यों को परिभाषित करते हुए अपनी खुद की एक पहचान का निर्माण करते हैं। विद्वानों ने (13-21) वर्ष की अवस्था को किशोरावस्था माना है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार किशोरावस्था यौनिक परिपक्वता से प्रारम्भ होती है और वैधानिक परिपक्वता पर समाप्त हो जाती है। परिवर्तन की इस अवस्था में माता पिता, शिक्षक, अभिभावक तथा अन्य लोग जो बालकों के कल्याण में रुचि रखते हैं और परिवार समाज व राष्ट्र की प्रगति चाहते हैं तो उन्हें किशोरों के विकास पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिये क्योंकि किशोर ही वर्तमान की शक्ति और भविष्य की आशा है। स्टेनले हॉल के अनुसार, ‘‘किशोरावस्था बड़े संघर्ष, तूफान व विरोध की अवस्था है।’’