Correct Answer:
Option B - विकास के दूसरे चरण के दौरान, 2 से 7 वर्ष की आयु के बच्चों में अंहकारी व्यवहार के लक्षण दिखने लगते हैं। अहंकेन्द्रिता स्वयं और दूसरों के बीच अंतर करने में असमर्थता है। बच्चा केवल अपने बारे में सोचता है न कि दूसरे लोगों को क्या चाहिए अर्थात वे दूसरो के विचारों को संज्ञान में नही लेते हैं। अत: हम कह सकते है कि केन्द्रीकरण का एक रूप अंहकेन्द्रवाद है, छोटे बच्चों को कभी-कभी वास्तविकता को अपने सिर के अंदर क्या हो रहा है से अलग करने मे परेशानी होती है। पियाजे ने बच्चों की स्वयं से बातचीत को अहंकेंद्रित भाषण कहा है और इसे पूर्व संक्रियात्मक अवस्था की विशेषता के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि बच्चा यह मान लेता है कि वह दुनिया का केंद्र है और सब कुछ उसके चारों ओर घूमता है। अभीष्ट उत्तर विकल्प (B) होगा।
B. विकास के दूसरे चरण के दौरान, 2 से 7 वर्ष की आयु के बच्चों में अंहकारी व्यवहार के लक्षण दिखने लगते हैं। अहंकेन्द्रिता स्वयं और दूसरों के बीच अंतर करने में असमर्थता है। बच्चा केवल अपने बारे में सोचता है न कि दूसरे लोगों को क्या चाहिए अर्थात वे दूसरो के विचारों को संज्ञान में नही लेते हैं। अत: हम कह सकते है कि केन्द्रीकरण का एक रूप अंहकेन्द्रवाद है, छोटे बच्चों को कभी-कभी वास्तविकता को अपने सिर के अंदर क्या हो रहा है से अलग करने मे परेशानी होती है। पियाजे ने बच्चों की स्वयं से बातचीत को अहंकेंद्रित भाषण कहा है और इसे पूर्व संक्रियात्मक अवस्था की विशेषता के रूप में देखते हैं। उनका कहना है कि बच्चा यह मान लेता है कि वह दुनिया का केंद्र है और सब कुछ उसके चारों ओर घूमता है। अभीष्ट उत्तर विकल्प (B) होगा।